100 वर्षीय स्वामी परमहंस महाराज जी ब्रह्मलीन..

Revanchal
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आध्यात्मिक जगत को अपूरणीय क्षति

दैनिक रेवांचल टाइम्स भोपाल:- आध्यात्मिक जगत के प्रकाश स्तंभ, 100 वर्षीय पूज्य स्वामी परमहंस महाराज जी आज ब्रह्मलीन हो गए। उनके महाप्रयाण से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। शिष्यों, श्रद्धालुओं एवं संत समाज में गहरा दुख व्याप्त है। जैसे ही उनके ब्रह्मलीन होने का समाचार फैला, आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। चित्रकूट के प्रसिद्द धारकुंडी आश्रम के संस्थापक परम पूज्य स्वामी जी महाराज लगभग 102 वर्षीय थे।

स्वामी जी का निधन आज प्रातः महाराष्ट्र के मुंबई में हुआ। स्वामी जी का संपूर्ण जीवन सेवा, साधना और मानव कल्याण को समर्पित रहा। उन्होंने जाति, धर्म और भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को प्रेम, करुणा और सत्य का मार्ग दिखाया। उनके प्रवचनों से लाखों लोगों को जीवन की दिशा मिली।

उनकी वाणी सरल थी, लेकिन विचार अत्यंत गहरे। वे कहते थे—
“मन को जीत लिया तो संसार अपने आप जीत लिया जाएगा।”
उनके द्वारा स्थापित आश्रम, में आज विशेष विमान के द्वारा मुम्बई से उनके चित्रकूट स्थित धारकुंडी आश्रम में लाया गया। जहां उनके अनुयायी और भक्त उनका अंतिम दर्शन का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

🌺 आध्यात्मिक जगत को अपूरणीय क्षति
स्वामी महाराज जी का वर्ष 1956 में घने जंगलों के बीच में अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त कर और कठोर तपस्या के चलते धारकुंडी आश्रम की स्थापना की थी। यह स्थान आज भी लाखों लोगों के लिए आस्था का केंद्र बिंदु हैं। हाल ही में स्वामी जी का शताब्दी वर्ष 1 जनवरी 2025 को आश्रम में भव्य जन्मोत्सव मनाया गया था।

जो उनके लिए और उनके अनुयायियों के लिए ऐतिहासिक क्षण था। स्वामी जी का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि एक युग का अंत माना जा रहा है। आध्यात्मिक जगत में उनकी भरपाई संभव नहीं है। वे संत परंपरा के ऐसे दीपक थे, जिनकी रोशनी पीढ़ियों तक मार्गदर्शन करती रहेगी।

🙏 शोक संवेदना
इस दुःखद अवसर पर हम सभी पूज्य स्वामी महाराज जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोक संतप्त शिष्यों और अनुयायियों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति। ॐ शांति। ॐ शांति।

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