नरसिंहपुर, 9 अप्रैल 2026: नशे के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए रेलवे चिकित्सक डॉ. आर. आर. कुर्रे (पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर) ने नशे के प्रकार, उसके दुष्परिणाम एवं रोकथाम के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शराब, तंबाकू और विभिन्न प्रकार के ड्रग्स न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
डॉ. कुर्रे के अनुसार, शराब का सेवन सबसे पहले लिवर को नुकसान पहुंचाता है, जिससे फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस और लिवर फाइब्रोसिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इसके साथ ही किडनी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वहीं तंबाकू, बीड़ी और सिगरेट के सेवन से मुंह और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, साथ ही हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और धड़कन संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने बताया कि नशा मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है, जिससे याददाश्त कमजोर होना, ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसके अलावा नशा व्यक्ति के प्रजनन तंत्र पर भी असर डालता है और नपुंसकता जैसी स्थिति उत्पन्न कर सकता है। नशे के कारण व्यक्ति मानसिक तनाव, डिप्रेशन, एंग्जायटी और आक्रामक व्यवहार का शिकार हो जाता है, जिससे समाज में अपराध की प्रवृत्ति भी बढ़ती है।
डॉ. कुर्रे ने कहा कि नशा व्यक्ति के सामाजिक और आर्थिक जीवन को भी कमजोर कर देता है। कई बार व्यक्ति की नौकरी छूट जाती है, कर्ज बढ़ जाता है और पारिवारिक संबंध खराब हो जाते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दृढ़ इच्छा शक्ति, सही उपचार, काउंसलिंग और डॉक्टर की सलाह से नशे की लत से छुटकारा पाया जा सकता है। शरीर को डिटॉक्स करने और जीवनशैली में सुधार लाने से भी काफी मदद मिलती है।
घरेलू उपायों के रूप में उन्होंने बताया कि मुनक्का शरीर के डिटॉक्स में सहायक होता है और नशे की तलब को कम कर सकता है। वहीं अदरक, नींबू और काला नमक का उपयोग गुटखा या तंबाकू की आदत कम करने में मददगार हो सकता है।
उन्होंने लोगों को संतुलित आहार, योग, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और नशा करने वाले साथियों से दूरी बनाने की सलाह दी। अंत में उन्होंने अपील की कि समाज को नशा करने वाले व्यक्तियों को सही मार्गदर्शन और सहयोग देना चाहिए, ताकि वे सामान्य जीवन में लौटकर एक स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जी सकें।
