नरसिंहपुर, 10 अप्रैल 2026: पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत रेलवे हॉस्पिटल नरसिंहपुर एवं रेलवे स्टेशन परिसर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान अलाउंसमेंट (घोषणाओं) के माध्यम से यात्रियों एवं आम नागरिकों को मातृ एवं शिशु पोषण के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में बताया गया कि गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक के पहले 1000 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यही समय बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास की नींव रखता है। एक स्वस्थ मां ही स्वस्थ बच्चे को जन्म देती है, इसलिए इस अवधि में संतुलित एवं पोषक आहार लेना अत्यंत आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और मिनरल से भरपूर भोजन करना चाहिए। आहार में दाल, अंडे, दूध, पनीर, गुड़, हरी पत्तेदार सब्जियां एवं मौसमी फल जैसे पपीता, सेब, अनार शामिल करना चाहिए, साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है।
शिशु आहार के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि जन्म से 6 माह तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिए। 6 से 12 माह के बच्चों को दलिया, खिचड़ी, उबला आलू और दाल का पानी दिया जा सकता है। वहीं 1 से 2 वर्ष के बच्चों को दाल, रोटी, सब्जी, पनीर और फल देना चाहिए।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि 0 से 3 वर्ष तक बच्चों का मानसिक विकास सबसे अधिक होता है, इसलिए इस दौरान विशेष पोषण पर ध्यान देना जरूरी है। साथ ही बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कराना भी आवश्यक है, जिससे वे बाहरी संक्रमण से सुरक्षित रह सकें।
डॉ. आर. आर. कुर्रे, पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर ने बताया कि “मां का सही पोषण ही शिशु को स्वस्थ जीवन प्रदान करता है। स्तनपान मां का सबसे बड़ा उपहार है।” उन्होंने सभी से जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की अपील की, ताकि एक स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण हो सके।
