अतिथि शिक्षक भोपाल से फिर लौटे निराश अब चुनाव लड़कर सदन तक पहुंचने का बना रहे मन

Revanchal
5 Min Read

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मण्डला। मण्डला जिले के अतिथि शिक्षक सैकड़ों की संख्या बल के साथ भोपाल अंबेडकर जयंती पार्क में बुलाए गए विशाल आंदोलन में सामिल हुए। जहां से खाली हाथ निराश वापस भी हो गए। संगठन के संस्थापक और मण्डला जिला अध्यक्ष पी.डी.खैरवार ने बताया ,कि हर बार की तरह इस बार भी सरकार का ध्यानाकर्षण कराने इस स्कूल अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आवाहन पर भोपाल के अंबेडकर जयंती पार्क में 29 अप्रैल को विशाल धरना प्रदर्शन किया गया।

जहां पर मण्डला जिले से सैकड़ों और प्रदेश भर से हजारों की संख्या में अतिथि शिक्षक पहुंचे हुए थे। अतिथि शिक्षकों ने कार्यानुभव के आधार पर नियमित रोजगार के साथ सरकारी नौकरी का दर्जा दिए जाने जैसी वर्षों से चली आ रही मांग को फिर से सरकार के सामने दोहराया है। बुधवार 29 अप्रैल को दस बजे से शाम पांच बजे तक सरकार का कोई भी जिम्मेदार धरना स्थल पर नहीं पहुंचा जिससे अतिथि शिक्षक खेमे में सरकार के प्रति भारी नाराजगी पनप गई है ।

अब सरकार की अतिथि शिक्षक विरोधी और शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने की मजबूरी की सुगबुगाहट जिले के हजारों अतिथि शिक्षक परिवार के बीच फैल रही है। मण्डला से भोपाल पहुंचे अतिथि शिक्षक संगठन पदाधिकारी हेमंत साहू ने बताया है,कि अतिथि शिक्षक 2008 से अत्यंत कम मानदेय में सेवाएं देते और कभी स्कूल से बाहर होते फिर काम पर आने की जद्दोजहद करते अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय सरकार को दिया है पर सरकार हमारे भविष्य के लिए तनिक सा भी विचार नहीं कर रही है।

अतिथि शिक्षक संजय सिसोदिया ने बताया कि इतनी चिलचिलाती तेज धूप में हजारों अतिथि शिक्षक नियमितीकरण की आस लगाए मैदान में दिन भर बैठकर सरकार के मुखिया का इंतजार ही करते रहे जो निराशा में बदल गई। अतिथि शिक्षक संगठन पदाधिकारी हेमराज मसराम ने बताया , कि सात साल पहले अतिथि शिक्षकों की संख्या डेढ़ लाख से ऊपर हुआ करती थी जिसको कम करते-करते सरकार ने इस वर्ष आधी से भी कम यानी साठ पैंसठ हजार तक ला दिया है।इस तरह लंबे समय से काम करते आ रहे अतिथि शिक्षक भी अब सरकार की नीतियों का शिकार होकर काम से बाहर होते आ रहे हैं।

जो न्यायसंगत नहीं है।जिसको लेकर तेज तपन के चलते भी भोपाल पहुंचकर हमने सरकार से बात करना चाहा था पर संभव नहीं हो सका और फिर से निराशा ही हाथ लगी। अतिथि शिक्षक संगठन पदाधिकारी उदय कुमार झारिया का कहना है,कि सरकार की सेवा करते करते ढलती उम्र हो जाने के बाद काम से अलग कर दिए गए अतिथि शिक्षकों के लिए तो चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा छाया हुआ है।

अब पचास पार होने के बाद काम की तलाश करने जाएं तो जाएं कहां। वरिष्ठ पदाधिकारी पी. डी. खैरवार ने सरकार की अतिथि शिक्षक विरोधी नीतियों को समझकर कहा है,कि अतिथि शिक्षकों के सामने एक ही चारा बचता है,कि सभी अतिथि शिक्षक संगठित होकर इस तरह सरकार की नीतियों से तंग हो रहे अन्य वर्गों का साथ लेकर अब राजनीति को माध्यम बनाया जाएगा।चुनाव लड़कर चुनाव में जीतकर सदन तक पहुंचकर अतिथि शिक्षकों , शोषित पीड़ितों और प्रदेश की शिक्षा के हित में अपनी बात दमदारी से रखे।

शायद सरकार भी यही समझकर अतिथि शिक्षकों के हित में कोई अच्छा निर्णय नहीं ले पा रही है।खैरवार ने अपील की है,कि सरकार की अतिथि शिक्षक विरोधी नीतियों से कोई भी अतिथि शिक्षक निराश न हो, संगठित रहकर समय का इंतजार करे और आगामी विधानसभा चुनाव के एक साल पहले तक सरकार के द्वारा उचित निर्णय नहीं लिए जाने पर चुनाव लड़कर सदन में जाने की तैयारी करें।

👁️ 4 views Views
Share This Article
Translate »