रेवांचल टाइम्स बीजाडांडी, मंडला
बीजाडांडी क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार लगातार पैर पसारता जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर आसपास के गांवों तक खुलेआम महुआ हाथ भट्टी एवं अंग्रेजी अवैध शराब की बिक्री होने के आरोप लग रहे हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार क्षेत्र में कई चाय-पान की दुकानें, टपरों घरों और अन्य ठिकानों पर आसानी से देशी और विदेशी शराब उपलब्ध हो जाती है।
हालात ऐसे हैं कि शराब प्रेमियों को शराब प्राप्त करने के लिए किसी विशेष प्रयास की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग की कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बीजाडांडी और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार संचालित हो रहा है। शाम ढलते ही चिन्हित स्थानों पर शराब की बिक्री शुरू हो जाती है और देर रात तक यह सिलसिला चलता रहता है। इससे न केवल कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि युवाओं में नशे की प्रवृत्ति भी तेजी से बढ़ रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
उल्लेखनीय है कि दिनांक 26 मई 2026 को जिला पंचायत सदस्य एवं वन स्थायी समिति की सभापति श्रीमती पुष्पा मरकाम द्वारा बीजाडांडी थाना में लिखित शिकायत देकर क्षेत्र में चल रहे अवैध शराब और सट्टे के कारोबार पर रोक लगाने की मांग की गई थी। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि गांव-गांव में अवैध शराब की बिक्री हो रही है तथा युवाओं का भविष्य नशे की गिरफ्त में जा रहा है। बावजूद इसके आज तक बड़े स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस कभी-कभार कार्रवाई के नाम पर क्षेत्र में पहुंचती जरूर है, लेकिन कुछ समय बाद लौट जाती है। जिन स्थानों पर लगातार शराब बिकने की शिकायतें हैं, वहां स्थायी और सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। यही कारण है कि अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद बने हुए हैं।
इसी बीच बीजाडांडी पुलिस ने 1 जून की दरम्यानी रात लगभग 12 बजे मुखबिर की सूचना पर शासकीय अस्पताल के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग पर घेराबंदी कर एक मोटरसाइकिल चालक को पकड़ा। पुलिस के अनुसार आरोपी हिमांशु मार्को, पिता रणजीत सिंह मार्को,टिकरिया थाना निवासी के कब्जे से 72 क्वार्टर अंग्रेजी शराब बरामद की गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर शराब एवं मोटरसाइकिल जब्त करने की कार्रवाई की।
हालांकि इस कार्रवाई के बाद भी स्थानीय लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब पूरे क्षेत्र में खुलेआम अवैध शराब की बिक्री हो रही है, तब केवल 72 क्वार्टर शराब की जब्ती को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना वास्तविक समस्या से ध्यान भटकाने जैसा प्रतीत होता है। जिन लोगों द्वारा गांव-गांव में शराब पहुंचाई जा रही है और जो लंबे समय से इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
क्षेत्र के नागरिकों का मानना है कि यदि पुलिस और आबकारी विभाग वास्तव में अवैध शराब के खिलाफ गंभीर हैं तो उन्हें छोटे वाहकों को पकड़ने के बजाय उस नेटवर्क तक पहुंचना चाहिए जो पूरे क्षेत्र में शराब की सप्लाई कर रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर वे कौन लोग हैं जिनके संरक्षण में यह कारोबार वर्षों से फल-फूल रहा है। बिना किसी संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर अवैध शराब की बिक्री संभव नहीं मानी जा सकती।
सबसे अधिक आश्चर्य की बात यह है कि आबकारी विभाग, जिसका मुख्य दायित्व ही अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाना है, उसकी सक्रियता क्षेत्र में लगभग नगण्य दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की ओर से नियमित जांच और प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण अवैध कारोबारी बेखौफ होकर अपना नेटवर्क चला रहे हैं।
बीजाडांडी क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक तथा आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि क्षेत्र में चल रहे अवैध शराब कारोबार की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाए। साथ ही उन बड़े कारोबारियों और संरक्षणदाताओं को भी चिन्हित किया जाए जिनकी वजह से गांव-गांव में नशे का जाल फैल रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार विभाग 72 क्वार्टर की जब्ती तक ही सीमित रहते हैं या फिर अवैध शराब के पूरे नेटवर्क पर प्रहार कर क्षेत्र को नशे के इस बढ़ते कारोबार से मुक्ति दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं। फिलहाल जनता के बीच यही चर्चा है कि छोटी-मोटी कार्रवाई से नहीं, बल्कि बड़े मगरमच्छों पर शिकंजा कसने से ही अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
