जबलपुर। कभी गर्मियों का राजा कहलाने वाला आम इन दिनों अपने ही सिंहासन से उतरकर आम जनता के दरबार में हाजिरी लगा रहा है। हालात ऐसे हैं कि जो आम कुछ हफ्ते पहले तक जेब टटोलने पर मजबूर कर देता था, वह अब थोक मंडी में इतने कम दाम पर मिल रहा है कि लोग कह रहे हैं “भैया, सब्जी कम खरीदो, आम ज्यादा ले जाओ।”
जबलपुर की फल थोक मंडी इन दिनों आमों से अटी पड़ी है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश से ट्रकों के ट्रक आम पहुंच रहे हैं। मंडी के गलियारों में नजर दौड़ाइए तो ऐसा लगेगा मानो पूरा देश अपनी मिठास लेकर जबलपुर पहुंच गया हो।
लेकिन इस मिठास के पीछे एक कड़वी कहानी भी छिपी है। दरअसल, इस बार विदेशों में आम का निर्यात लगभग ठप पड़ गया है। जो आम दुबई, लंदन और यूरोप की दुकानों की शोभा बढ़ाते थे, वे अब स्थानीय मंडियों में खरीदारों का इंतजार कर रहे हैं। नतीजा यह हुआ कि बाजार में आम की भरमार हो गई और दाम धड़ाम से नीचे आ गए।
थोक व्यापारियों का कहना है कि स्टॉक इतना ज्यादा है कि मंडी में आम रखने की जगह कम पड़ रही है। सबसे ज्यादा चर्चा तोता परी आम की है, जो कभी अपनी अलग पहचान रखता था, लेकिन आज थोक में मात्र 25 रुपये किलो तक बिक रहा है।
वहीं दशहरी, बादाम, हापुस, केसर, आम्रपाली, लंगड़ा, चौसा और फजरी जैसी नामी किस्में भी 30 से 40 रुपये किलो के बीच सिमट गई हैं। यानी जो फल कभी “स्टेटस सिंबल” माना जाता था, वह अब हर घर की थाली तक पहुंचने की तैयारी में है।
हालांकि उपभोक्ता इस गिरावट से खुश हैं, लेकिन किसान और व्यापारी परेशान हैं। उनके चेहरे पर वही सवाल है “आम तो बिक रहा है, लेकिन कमाई कहां है?” लागत बढ़ी हुई है, उत्पादन अच्छा हुआ है, लेकिन दाम इतने नीचे चले गए हैं कि मुनाफा दूर की बात, खर्च निकालना भी चुनौती बन गया है।
व्यापारियों का अनुमान है कि यदि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रही और निर्यात दोबारा शुरू नहीं हुआ, तो आम के दाम और नीचे जा सकते हैं। यानी फिलहाल आम प्रेमियों के लिए यह किसी खुशखबरी से कम नहीं।
तो जनाब, गर्मी चाहे जितनी पड़े, इस मौसम में एक सलाह मुफ्त है आम को अब खास फल समझकर मत खाइए, क्योंकि इस बार आम सचमुच सरेआम आम हो गया है।
मुहम्मद अनवार बाबू
