शासन की 15 प्रतिशत तबादला नीति सिवनी आते-आते क्यों हो गई ढाई प्रतिशत?
दैनिक रेवांचल टाइम्स सिवनी– जिले में जारी पटवारियों की स्थानांतरण सूची के बाद तबादला नीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चर्चा का विषय यह है कि जिले में कुल 556 पटवारियों में से केवल 14 के ही तबादले किए गए हैं। यह संख्या कुल पदस्थ पटवारियों का लगभग ढाई प्रतिशत ही बैठती है।
तीन साल की नीति या तीस साल की व्यवस्था?
शासन समय-समय पर यह स्वीकार करता रहा है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने से कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जवाबदेही कम होती है और भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ती हैं। इसी कारण कुछ पदों के लिए तीन वर्ष और कुछ के लिए पांच वर्ष की अवधि निर्धारित की गई है।
इसके बावजूद जिले में ऐसे कई कर्मचारी और अधिकारी हैं जो वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ बने हुए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर नियमों के बावजूद व्यवस्थाएं क्यों नहीं बदल पा रही हैं।
वर्षों से जमे कर्मचारियों के आगे क्यों कमजोर पड़ जाती हैं नीतियां?
अब चौक-चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक यही चर्चा है कि यदि तबादला नीति का उद्देश्य प्रशासनिक निष्पक्षता और जवाबदेही बढ़ाना है, तो उसका प्रभाव जमीन पर क्यों दिखाई नहीं देता।
व्यवस्था नहीं बदली तो सरकार पर भी पड़ेगा असर
जनचर्चा यह भी है कि यदि लंबे समय से जमे कर्मचारियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका असर जनता के विश्वास पर पड़ सकता है। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में समय-समय पर बदलाव आवश्यक है, ताकि कर्मचारियों में जवाबदेही बनी रहे और जनता का भरोसा मजबूत हो।
556 में से सिर्फ 14 तबादले कई सवाल छोड़ गए हैं, जिनका जवाब अब प्रशासन और शासन दोनों को देना होगा।
