प्रभारी मंत्री के निर्देशों की अनदेखी, कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। जिले में स्थानांतरण आदेशों के पालन को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था सवालों के घेरे में है। प्रभारी मंत्री द्वारा वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी एवं कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए जाने के बावजूद कई अधिकारी-कर्मचारी अब तक अपनी पुरानी कुर्सियों पर जमे हुए हैं। इससे शासन के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, स्थानांतरण नीति के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दूसरे स्थानों पर पदस्थ किया गया था। इनमें ऐसे अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हैं जिन पर विभिन्न शिकायतें एवं भ्रष्टाचार संबंधी आरोप लग चुके हैं। शासन की मंशा प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की थी, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
सूत्रों का कहना है कि स्थानीय स्तर में स्थानांतरण आदेश जारी होने के कई दिन बाद भी अनेक अधिकारी और कर्मचारी अपने पुराने कार्यालयों में कार्य कर रहे हैं। न तो उन्होंने नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण किया है और न ही संबंधित विभागों द्वारा उन्हें तत्काल कार्यमुक्त किए जाने की प्रक्रिया पूरी की गई है।
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कलेक्टर स्तर से स्थानांतरण आदेशों के पालन को लेकर अपेक्षित सख्ती नहीं बरती जा रही है, जिसके चलते अधिकारी-कर्मचारी शासन के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यदि समय रहते आदेशों का पालन नहीं कराया गया तो शासन की स्थानांतरण नीति का उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा।
अब लोगों की नजर जिला प्रशासन पर टिकी हुई है कि आखिर कब तक ट्रांसफर हो चुके अधिकारी-कर्मचारी अपनी पुरानी कुर्सियों पर बने रहेंगे और शासन के आदेशों को धरातल पर कब लागू किया जाएगा। जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है तथा आमजन भी प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की जनअपेक्षा कर रहे हैं।
