दैनिक रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा।
जहां आधुनिक जीवनशैली और तनाव के कारण बांझपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है, वहीं आयुर्वेद एक नई उम्मीद बनकर सामने आ रहा है। इसी दिशा में डॉ. रश्मि नेमा अपने समर्पण, अनुभव और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से अनेक दंपत्तियों के जीवन में खुशियां भर रही हैं।
आयुष विभाग में कार्यरत डॉ. रश्मि नेमा (प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ) द्वारा पंचकर्म एवं विशेष आयुर्वेदिक उपचारों के माध्यम से उन दंपत्तियों को भी संतान सुख प्राप्त हो रहा है, जो वर्षों से निराशा का सामना कर रहे थे। आयुर्वेद में शरीर के संतुलन (दोष, धातु और अग्नि) को ठीक कर प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जाती है, जिसे कई शोधों में भी सकारात्मक बताया गया है।
डॉ. रश्मि नेमा का मानना है कि सही निदान, उचित आहार-विहार और नियमित पंचकर्म उपचार के जरिए बिना साइड इफेक्ट के बांझपन का समाधान संभव है। उनके मार्गदर्शन में कई ऐसे केस सामने आए हैं, जहां वर्षों की प्रतीक्षा के बाद दंपत्तियों को माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
डॉक्टर्स डे के अवसर पर क्षेत्रवासियों ने डॉ. रश्मि नेमा के इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। लोगों का कहना है कि वे न केवल एक कुशल चिकित्सक हैं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा भी हैं, जो आयुर्वेद के माध्यम से जीवन में नई खुशियां ला रही हैं।
