रेवांचल टाइम्स मंडला | घुघरी
तहसील मुख्यालय घुघरी स्थित मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक इन दिनों गंभीर कैश संकट से जूझ रहा है। पिछले तीन-चार दिनों से बैंक में नकदी की भारी किल्लत के चलते ग्रामीणों, किसानों, मजदूरों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोग घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन अंत में उन्हें सिर्फ एक जवाब मिलता है— “कैश खत्म हो गया है।”
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बैंक में नकदी उपलब्ध नहीं है तो इसकी सूचना पहले ही सार्वजनिक की जानी चाहिए। लेकिन यहां स्थिति उलट है—लोग किराया खर्च कर, पूरा दिन बर्बाद कर बैंक पहुंचते हैं और फिर खाली हाथ लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
सबसे अधिक परेशानी गरीब परिवारों को हो रही है, जिन्हें इलाज, खेती-किसानी, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए तत्काल नकदी चाहिए। सरकारी योजनाओं के हितग्राही भी रोज बैंक के चक्कर काट रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब कई दिनों से कैश संकट बना हुआ है तो बैंक प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को क्षेत्र की जरूरतों का अंदाजा नहीं? या फिर आम जनता की परेशानी अब संवेदनहीन व्यवस्था के लिए मायने ही नहीं रखती?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतनी गंभीर समस्या के बावजूद बैंक प्रशासन और उच्च अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। यदि जल्द पर्याप्त नकदी उपलब्ध नहीं कराई गई तो जनता का आक्रोश बढ़ना तय है।
घुघरी का बैंक अब शायद नई बैंकिंग सेवा शुरू कर चुका है—
“लाइन में लगो, उम्मीद जगाओ और खाली हाथ घर जाओ योजना।”
लगता है बैंक का नया स्लोगन कुछ ऐसा होना चाहिए—
“आपका पैसा आपके खाते में सुरक्षित है… बस निकालना मत!”
ग्रामीण पूछ रहे हैं—
क्या बैंक अब बचत रखने की जगह सिर्फ धैर्य की परीक्षा लेने का केंद्र बन गया है?
अगर यही हाल रहा तो जल्द बैंक के बाहर बोर्ड लगाना पड़ेगा—
“कैश की उम्मीद लेकर अंदर न आएं, निराशा मुफ्त में उपलब्ध है।”
