एनएच-543 निर्माण कंपनी पर आरोप उपजाऊ खेत में डाला 200 ट्रक मलबा,ग्रामीण बोले खेती बर्बाद, शिकायतों पर भी नहीं हुई कार्रवाई

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स मंडला जिले में बन रही एनएच-543 सड़क परियोजना अब विवादों के घेरे में आ गई है। मंडला से डिंडौरी मार्ग का निर्माण कर रही निर्माण कंपनी हिलविच काका कंस्ट्रक्शन पर ग्रामीणों ने आरोप लगाए हैं। आरोप है कि कंपनी ने बिना अनुमति निजी कृषि भूमि पर रात के अंधेरे में सड़क निर्माण का भारी मलबा डालकर उपजाऊ जमीन को बर्बाद कर दिया।

इतना ही नहीं, अवैध उत्खनन, प्रदूषण फैलाने और शिकायत करने पर धमकी देने जैसे आरोप भी सामने आए हैं। मामला अब जनसुनवाई तक पहुंच गया है, जहां ग्रामीणों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहगांव क्षेत्र स्थित कृषि भूमि खसरा क्रमांक 111/5 पर कंपनी द्वारा लगभग 150 से 200 ट्रक सड़क निर्माण से निकला मलबा डाल दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब कार्य बिना किसी अनुमति और नियमों की अनदेखी करते हुए किया गया।

आरोप है कि कंपनी ने रात के समय ट्रकों के जरिए सड़क से निकला डामर, गिट्टी, कंकड़ और अन्य मिक्स मलबा खेत में फिंकवा दिया, जिससे पूरी उपजाऊ जमीन खराब हो गई।


भूमि स्वामी राजेश यादव एवं ग्रामीणों के अनुसार जिस खेत में पहले खेती होती थी, वहां अब मलबे का ढेर लगा हुआ है। खेत की मिट्टी पूरी तरह खराब हो चुकी है और पिछले दो वर्षों से खेती नहीं हो पा रही। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी ने केवल खेत को नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि गांव के पर्यावरण को भी प्रदूषित किया है। आरोप है कि कृषि भूमि के आसपास गिट्टी प्लांट संचालित कर धूल और प्रदूषण फैलाया जा रहा है, जिससे आसपास के ग्रामीण भी परेशान हैं।


ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले भी तहसील कार्यालय मोहगांव में 30 अगस्त 2024 को लिखित रूप से की गई थी। शिकायत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई का आश्वासन तो दिया, लेकिन मामला सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया। यहां तक कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 में दर्ज शिकायत भी बिना समाधान के बंद कर दी गई। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि कंपनी और प्रशासन की मिलीभगत के कारण शिकायतों को दबाया जा रहा है।मामले में सबसे गंभीर आरोप अवैध उत्खनन को लेकर लगाए गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी द्वारा क्षेत्र में 40 से 50 फीट तक गहरी खुदाई कर दी गई है, जिससे जमीन की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों के अनुसार इस उत्खनन के कारण दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई है। बरसात के समय यह गहरी खुदाई किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो कंपनी के अधिकारियों ने पहले समझाने का प्रयास किया और बाद में मलबा हटाने तथा जमीन समतल कराने का आश्वासन दिया। लेकिन समय बीतता गया और न मलबा हटाया गया और न ही जमीन को पूर्व स्थिति में लाया गया। उल्टा अब शिकायत करने वाले ग्रामीणों को धमकियां मिल रही हैं।राजेश यादव और अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी के कुछ अधिकारी और कर्मचारी उन्हें मारपीट और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं ताकि वे शिकायत वापस ले लें। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो किसी दिन बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।
जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही खेत में डाले गए मलबे को तत्काल हटाकर जमीन को समतल कराया जाए ताकि किसान दोबारा खेती कर सकें। ग्रामीणों ने अवैध उत्खनन की जांच कर संबंधित कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।यह मामला अब कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर बिना अनुमति निजी कृषि भूमि पर सैकड़ों ट्रक मलबा कैसे डाला गया यदि शिकायतें पहले से हो रही थीं तो प्रशासन ने कार्रवाई क्यों नहीं की मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत बिना समाधान के कैसे बंद कर दी गई क्या बड़े प्रोजेक्ट के नाम पर किसानों की जमीन और अधिकारों को कुचला जा रहा है एनएच-543 जैसी बड़ी सड़क परियोजनाएं विकास की पहचान मानी जाती हैं, लेकिन यदि विकास की कीमत किसानों की उपजाऊ जमीन और ग्रामीणों की सुरक्षा बन जाए तो यह चिंता का विषय है। सरकार सड़क निर्माण के जरिए क्षेत्र को जोड़ने का दावा कर रही है, लेकिन दूसरी ओर किसानों की जमीन मलबे में दफन होती दिखाई दे रही है।अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। क्या कंपनी पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर यह मामला भी शिकायतों और आश्वासनों के बीच दबकर रह जाएगा फिलहाल ग्रामीण न्याय की मांग को लेकर प्रशासन के दरवाजे खटखटा रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी जमीन और अधिकार बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।

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