“आखिर जंगल किसका? और जिम्मेदारी किसकी? जंगल मे चल रहा है जंगल राज…
दैनिक रेवांचल टाइम्स अंजनिया / मंडला जिले के अंजनिया जगमंडल के अधिकारी और कर्मचारी इन दिनों चैन की नींद सो रहे हैं ऐसा हम नहीं बल्कि अंजनिया की आमजनता कह रही हैं क्योंकि उपतहसील कार्यालय अंजनिया के बगल स्थित जगमंडल की वन भूमि (खसरा नंबर 1592) इन दिनों “जिसकी लाठी उसकी भैंस” वाली कहावत को चरितार्थ करती नजर आ रही है। वन विभाग की जमीन पर खुलेआम बेजा अतिक्रमण हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ऐसे गायब हैं जैसे यह जमीन किसी और ग्रह की हो।

हैरानी की बात तो यह है कि महज 300 मीटर की दूरी पर वन विभाग का दफ्तर मौजूद हैं और भी इससे बड़ी हास्यास्पद वाली बात तो यह हे कि उक्त जमीन के बगल में ही राजस्व कार्यालय उपतहसील अंजनिया स्थित हैं —यानी अतिक्रमणकारियों के लिए यह “VIP लोकेशन” बन चुकी है, जहां कब्जा करो और बेफिक्र रहो!
जब मामले की जानकारी लेने के लिए रेंजर लतिका तिवारी मैडम से पूछा गया तो उन्होंने बड़े ही सलीके से जिम्मेदारी को पास करते हुए कहा—“यह जमीन हमारे अधीन नहीं आती, मोहगांव प्रोजेक्ट की है।”
अब बारी आई मोहगांव प्रोजेक्ट के रेंजर सुरेन्द्र चिचखेड़े की, तो उन्होंने भी वही पुराना सरकारी राग अलापा—“यह मेरी बीट में नहीं आता।”
मतलब साफ है—जमीन वन विभाग की, लेकिन जिम्मेदारी ‘किसी की नहीं’ तो इसका मतलब साफ हे कि जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी कौमें पर है और भूमाफिया विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों की नाक के नीचे या यूं कहें संरक्षण या सांठगांठ के चलते हुऐ बेजा अतिक्रमण किए जा रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस शासकीय वन विभाग की जमीन का “माई-बाप” कौन है?
और क्या वन विभाग के अधिकारी जिम्मेदारी से ऐसे ही पल्ला झाड़ते रहेंगे?
या फिर अतिक्रमणकारी ही अब “नए मालिक” घोषित कर दिए जाएंगे?
लगता है वन विभाग ने नई नीति बना ली है—
“जहां विवाद हो, वहां जिम्मेदारी से इनकार हो!”
और अतिक्रमणकारियों के लिए भी शायद संदेश साफ है—
“डरो मत, विभाग खुद कन्फ्यूज है!”
अब देखना दिलचस्प होगा कि “रेवांचल टाइम्स” की खबर से विभाग की नींद खुलती है या फिर कुंभकर्ण की तरह कान में रुई डालकर सोते रहेंगे, और जंगल की जमीन पर कब्जे का खेल यूं ही चलता रहेगा।
अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में वन विभाग की जमीन का नक्शा किताबों में ही बचेगा और जमीनी हकीकत में “अतिक्रमण विभाग” का राज होगा।
वही दूसरी ओर जिले में भू माफ़िया राज चल रहा है जहाँ इनके द्वारा न शासकीय न राजस्व और न वन भूमि सब मे तालमेल बनाकर लूट रहे है और जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी थोडे से लालच के चलते अपना ईमान और धर्म कर्म छोड़ अपनी जिम्मेदारी से मुकरते नजर आ रहे है और लगातार अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद है और इन्हें भी पता है कि विभाग हो या राजस्व विभाग सब नोटिश देकर मामंले को इतिश्री करगे और ये मौज करेंगे।
इनका कहना है….
उक्त जमीन मेरे अधीनस्थ नहीं आती जिस जमीन की आप बात कर रहे है वो तो मोहगांव प्रोजेक्ट के अंतर्गत आती हैं इसीलिए उसमें हम जायदा कुछ नहीं कर सकते।
लतिका तिवारी रेंजर
जगमंडल अंजनिया मंडला
जिस जमीन की आप बात कर रहे हैं वो मेरे अधीनस्थ नहीं है मेरा एरिया तो अहमदपुर चौराहे से से लेकर रामनगर रोड वाला हैं।
सुरेन्द्र चिचखेड़े
मोहगांव प्रोजेक्ट मैन4
