एफआईआर के बाद भी मिला प्रभार, सवालों के घेरे में कृषि विभाग; जवाब से बचते नजर आए वरिष्ठ अधिकारी

Revanchal
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आख़िर इन भ्रष्टों पर संरक्षण किसका

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मण्डला। कृषि विभाग में पदस्थ प्रभारी उप संचालक अश्वनी झारिया को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। अश्वनी झारिया पर भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जबलपुर द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर मण्डला जिले में पदस्थ किया गया है। अब इस मामले को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विभागीय जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।

अशवनी झारिया, प्रभारी उपसंचालक कृषि मण्डला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईओडब्ल्यू द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने और जांच शुरू होने के कुछ समय बाद ही अश्वनी झारिया को प्रभारी उप संचालक का दायित्व देकर मण्डला भेजा गया। आरोप है कि मण्डला में पदभार संभालने के बाद भी उनके कार्यकाल को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मामले में जब रेवांचल टाइम्स ने कृषि विभाग के डायरेक्टर उमाशंकर भार्गव से संपर्क करने का प्रयास किया तो बताया गया कि वे दिल्ली में आयोजित बैठक में व्यस्त हैं। वहीं विभागीय सचिव निशांत वरवड़े से संपर्क करने पर उनके फ्लाइट में होने की जानकारी दी गई। जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे द्वारा मामले पर चर्चा किए जाने की बात कही गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर भ्रष्टाचार संबंधी मामले में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद संबंधित अधिकारी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई। साथ ही यह भी सवाल उठ रहे हैं कि यदि मामले में कोई अनियमितता नहीं है तो वरिष्ठ अधिकारी सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे हैं।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और कृषि विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं तथा उठ रहे सवालों का जवाब कब तक सामने आता है।
अब किसानो का सब्र का बान टूटता नज़र आ रहा हैं कह रहें है आख़िर सरकार भ्रष्ट रिसवतख़ोर घोटालेबाज़ अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं बल्कि उन्हें संरक्षण के तोर पर उन्नति दी रही रही है सरकार कहती है की किसानों की सरकार पर जिस तरह से भ्रष्टाचार और लूट किसानो के नाम पर मची हुई है यह किसी से छुपा नहीं हैं और सरकार के संरक्षण में ही भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी पनप रहें है जिन पर एफ आई आर हो चुकी है वह आज मलाईदार पद किसी को येसे ही नहीं मिल जाता है मतलब साफ़ जितना बड़ा घोटाला भ्रष्टाचार उतना बड़ा पद और किसान की सुन कौन रहा है पर वह दिन दूर नहीं है जब किसान अपनी ताक़त दिखाइए और अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने मजबूर होगें और यह सब जल्द होगा

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