करोड़ों का भवन या भ्रष्टाचार का प्लास्टरउद्घाटन से पहले ही फटी दीवारें, बच्चों की जान से खिलवाड़ का आरोप

Revanchal
6 Min Read

रेवांचल टाइम्स मोहगांव, मंडला मध्यप्रदेश शासन द्वारा युवाओं को तकनीकी शिक्षा और सुरक्षित छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मोहगांव विकासखंड में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित कराया जा रहा आईटीआई भवन, छात्रावास और आवासीय क्वार्टर अब विवादों में घिर गया है। लगभग 11.61 करोड़ रुपये (1161.51 लाख) की लागत से तैयार यह भवन उद्घाटन से पहले ही अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। अधिकारियों एवं ठेकेदार की ईमानदारी साफ झलक रही है भवन की दीवारों में उभरती दरारें, निर्माण गुणवत्ता पर उठते सवाल और अधिकारियों-ठेकेदार की कथित सांठगांठ अब पूरे निर्माण कार्य को संदेह के घेरे में खड़ा कर रही है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार यह भवन विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा किया गया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जिस भवन में अभी छात्रों ने कदम भी नहीं रखा, उसकी दीवारें जगह-जगह से फटने लगी हैं। सवाल यह है कि जब भवन का यह हाल अभी है, तो कुछ वर्षों बाद इसकी स्थिति क्या होगी।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार निर्माण कार्य का जिम्मा हाइड्रो इंडिया प्रोजेक्ट्स, इंदौर को सौंपा गया था। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग (PIU) के अधिकारियों की निगरानी में कराया गया। आरोप है कि कार्यपालन यंत्री,पारस सिंह उपयंत्री राजेश गुप्ता और सहायक यंत्री श्रीमति रश्मि छांटा की देखरेख में निर्माण तो हुआ, लेकिन गुणवत्ता मानकों को ताक पर रख दिया गया। अब जब दो अधिकारी स्थानांतरित हो चुके हैं, तब करोड़ों की यह इमारत अपने निर्माण की सच्चाई उजागर करती दिखाई दे रही है।

दीवारों में दरारें या भ्रष्टाचार के सबूत

भवन की दीवारों में दिखाई दे रही दरारों को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि जहां-जहां दरारें उभर रही हैं, वहां ठेकेदार द्वारा सबूत मिटाने के लिए उन्हें पुट्टी और प्लास्टर से भरकर छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि भवन पूरी तरह सुरक्षित है तो फिर दरारों को छिपाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है


जानकारों का मानना है कि किसी भी नए भवन में इस स्तर की दरारें तकनीकी खामी का संकेत हो सकती हैं। यदि निर्माण सामग्री मानक स्तर की हो और तकनीकी मापदंडों का पालन किया गया हो तो करोड़ों रुपये की नई इमारत इतनी जल्दी सवालों के घेरे में नहीं आती।


क्या एक्सपायरी सीमेंट और घटिया सामग्री से हुआ निर्माण
सूत्रों का दावा है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लिया गया। आरोप है कि बिना टेस्टिंग की रेत, गिट्टी और अन्य सामग्री का उपयोग किया गया। यहां तक कि एक्सपायरी डेट की सीमेंट इस्तेमाल किए जाने जैसी चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी धन की खुली लूट मानी जाएगी।
बच्चों के भविष्य से ज्यादा जेब भरने की चिंता
यह भवन 60 सीटर बालक एवं बालिका छात्रावास के साथ आईटीआई संस्थान के लिए बनाया गया है, जहां छात्र तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। लेकिन जिस भवन की नींव पर ही सवाल उठ रहे हों, वहां बच्चों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को विद्यार्थियों की सुरक्षा और भविष्य की चिंता नहीं रही, बल्कि पूरा ध्यान निर्माण कार्य से होने वाले आर्थिक लाभ पर केंद्रित रहा। यही कारण है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गुणवत्ता कहीं नजर नहीं आ रही।


अधिकारी मौन, सवालों से बचने की कोशिश
मामले में जब संबंधित सहायक यंत्री से फोन के माध्यम से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इससे संदेह और गहरा गया है। यदि निर्माण कार्य पूरी तरह मानकों के अनुरूप हुआ है तो विभाग को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि भवन का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाए। निर्माण में उपयोग हुई सामग्री की प्रयोगशाला जांच कराई जाए और पूरी परियोजना की गुणवत्ता की जांच किसी बाहरी एजेंसी से कराई जाए। यदि निर्माण में गड़बड़ी पाई जाती है तो ठेकेदार से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक पर कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या करोड़ों रुपये की यह इमारत शिक्षा का मंदिर बनेगी क्या छात्र यहां सुरक्षित रह पाएंगे या भविष्य में किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है
और सबसे बड़ा सवाल—क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर करोड़ों का यह खेल भी फाइलों में दफन हो जाएगा।
मोहगांव का यह निर्माण कार्य अब केवल एक भवन नहीं, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही की अग्निपरीक्षा बन चुका है। जनता जवाब मांग रही है, अब देखना यह है कि प्रशासन जांच करता है या भ्रष्टाचार की दरारों पर भी प्लास्टर फेर दिया जायगा।

👁️ 7 views Views
Share This Article
Translate »