दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला। मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक गरीब महिला की रोजी-रोटी पर बुलडोजर चलने का मामला अब शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। चर्चा है कि पैसों और रसूख के दम पर दबंग लोग न केवल सरकारी तंत्र को अपनी मुट्ठी में किए हुए हैं, बल्कि गरीबों के अधिकार भी कुचल रहे हैं।
तहसील नैनपुर के ग्राम पाठा सिहोरा में ग्राम परसवाड़ा निवासी अनीता यादव छोटे से ठेले में जनरल स्टोर चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही थीं। महिला का आरोप है कि ग्रामवासियों की सहमति से उन्होंने शासकीय भूमि पर दुकान निर्माण शुरू किया था, लेकिन करीब एक वर्ष पहले मंडला निवासी कपिल कछवाहा और उसके साथियों ने दुकान तोड़ दी। शिकायतें पुलिस और राजस्व विभाग तक पहुंचीं, मगर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ फाइलें घूमती रहीं।
महिला का आरोप है कि राजस्व विभाग ने मामले को एक साल तक लटकाए रखा और फिर 17 अप्रैल को अचानक जेसीबी मशीन लगाकर उसकी दुकान को हटवा दिया। इस दौरान राजस्व निरीक्षक और पुलिस की मौजूदगी ने पूरे मामले को और भी संदेहास्पद बना दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कार्रवाई वैधानिक थी तो क्या महिला को नियमानुसार नोटिस दिया गया? क्या उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिला? क्या आदेश की प्रति दी गई? यदि नहीं, तो फिर यह कार्रवाई किस कानून के तहत की गई?
महिला का दावा है कि उसके पास ऐसे दस्तावेज हैं जो संबंधित भूमि को शासकीय बताते हैं, लेकिन राजस्व विभाग ने कथित तौर पर उन दस्तावेजों को नजरअंदाज कर दबंग पक्ष के दावों को प्राथमिकता दी। अब आरोप यह भी है कि दुकान हटने के बाद उक्त जमीन पर कब्जा कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।
कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार शिकायतें सौंपे जाने के बावजूद अब तक न तो निष्पक्ष जांच हुई और न ही किसी अधिकारी की जवाबदेही तय की गई। इससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर गरीब महिला को न्याय देने में किसका हाथ रुक रहा है? क्या प्रशासन दबंगों के दबाव में काम कर रहा है या फिर पूरा मामला मिलीभगत का परिणाम है?
जनता पूछ रही है—
एक गरीब महिला की रोजी-रोटी उजाड़ने वालों पर कार्रवाई कब होगी?
संदिग्ध राजस्व कार्रवाई की उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं कराई जा रही?
आखिर कब तक दबंगों के सामने गरीबों का हक कुचला जाता रहेगा?
यदि महिला के आरोप सही हैं तो यह केवल अतिक्रमण का मामला नहीं, बल्कि एक गरीब परिवार की आजीविका छीनने, अधिकारों का हनन करने और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाने वाला मामला है। अब जरूरत है कि शासन तत्काल हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे और पीड़ित महिला को न्याय दिलाए। अन्यथा यह संदेश जाएगा कि मंडला जिले में कानून नहीं, बल्कि रसूख और पैसे का राज चल रहा है।
