सरपंच के परिजनों की फर्म से खरीदी के आरोप, धुंधले बिलों और अधूरे दस्तावेजों ने खड़े किए गंभीर सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स सिवनी– जनपद पंचायत सिवनी अंतर्गत ग्राम पंचायत कन्हान पिपरिया एक बार फिर चर्चाओं में है। पहले पंचायत के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे थे, अब सामग्री खरीदी और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत में कराए गए कई निर्माण कार्यों में अनियमितताएं हैं, वहीं सामग्री खरीदी में भी नियमों की अनदेखी की गई है।


सरपंच के कार्यकाल में शुरू हुई फर्म, पंचायत में लगे लाखों के बिल
पंचायत के अभिलेखों में डेहरिया ट्रेडर्स नामक प्रतिष्ठान के अनेक बिल लगाए गए हैं। दस्तावेजों के अनुसार उक्त फर्म का जीएसटी पंजीयन वर्ष 2023 में हुआ, जो वर्तमान सरपंच के कार्यकाल का ही समय है। आरोप है कि पंचायत में सामग्री आपूर्ति का अधिकांश कार्य इसी फर्म के माध्यम से किया गया।
जब फर्म के संबंध में जानकारी जुटाई गई तो बताया गया कि प्रतिष्ठान का संचालन सरपंच परिवार से जुड़े व्यक्ति द्वारा किया जाता है। यदि यह तथ्य सही है तो यह हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला बन सकता है, जिसकी जांच आवश्यक है।
बिलों में सचिव के हस्ताक्षर नहीं, आखिर भुगतान कैसे हुआ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि डेहरिया ट्रेडर्स से संबंधित जिन बिलों के आधार पर भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है, उनमें अनेक स्थानों पर केवल सरपंच रूपलता डेहरिया के हस्ताक्षर दिखाई देते हैं, जबकि सचिव के हस्ताक्षर नहीं हैं।
पंचायत की वित्तीय प्रक्रिया में सचिव की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि इन बिलों के आधार पर भुगतान हुआ तो सचिव के हस्ताक्षर क्यों नहीं हैं? क्या सचिव ने इन बिलों का सत्यापन नहीं किया था या फिर कोई अन्य प्रक्रिया अपनाई गई? यह पूरा मामला जांच का विषय है।
जीएसटी बिलों में भी कई विसंगतियां
दस्तावेजों के अवलोकन में यह भी सामने आया कि कुछ बिलों में जीएसटी नंबर अंकित है तो कुछ में नहीं। एक ही प्रतिष्ठान के बिलों में अलग-अलग प्रारूप दिखाई देते हैं। कई मामलों में जीएसटी गणना एवं अभिलेख संधारण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
धुंधले बिलों से क्या छिपाने की कोशिश?
शासन ने पंचायतों में पारदर्शिता लाने के लिए सभी दस्तावेज सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन आरोप है कि पंचायत द्वारा अपलोड किए गए कई बिलों एवं दस्तावेजों की प्रतियां इतनी धुंधली (ब्लर) हैं कि उनमें जीएसटी नंबर, राशि, सामग्री विवरण और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो दस्तावेज स्पष्ट रूप से अपलोड किए जाने चाहिए थे। धुंधले दस्तावेज संदेह को और बढ़ाते हैं।
दीपक डेहरिया की भूमिका क्या रही?
ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई है कि पंचायत की सामग्री खरीदी प्रक्रिया में दीपक डेहरिया की भूमिका की जांच की जाए। यदि वे संबंधित फर्म के संचालन से जुड़े हैं तो यह देखा जाए कि पंचायत द्वारा खरीदी के लिए विधिवत निविदा या कोटेशन प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं। क्या अन्य व्यापारियों को भी अवसर दिया गया था अथवा खरीदी एक ही प्रतिष्ठान तक सीमित रही?
निर्माण कार्य भी सवालों के घेरे में
पंचायत में कराए गए सीसी रोड, पुल-पुलिया, श्मशान घाट रोड, प्रार्थना कक्ष एवं अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी पहले से सवाल उठते रहे हैं। कई कार्य अल्प समय में ही क्षतिग्रस्त होने लगे हैं, जबकि कुछ निर्माण कार्य सरपंच के कार्यकाल के प्रारंभ में शुरू हुए थे और आज तक पूर्ण नहीं हो सके हैं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि ग्राम पंचायत कन्हान पिपरिया में वर्ष 2023 से अब तक कराए गए समस्त निर्माण कार्यों, सामग्री खरीदी, भुगतान प्रक्रिया, जीएसटी अभिलेखों, सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड दस्तावेजों तथा संबंधित फर्म की भूमिका की उच्च स्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए।
उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता सिद्ध होती है तो मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम तथा वित्तीय नियमों के तहत दोषी पाए जाने वाले सरपंच, सचिव एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई करते हुए शासकीय राशि की रिकवरी भी की जानी चाहिए।
सवाल अभी भी बाकी है…
यदि खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमसम्मत थी, तो फिर बिलों में इतनी विसंगतियां क्यों हैं? सचिव के हस्ताक्षर क्यों नहीं हैं? और सार्वजनिक पोर्टल पर दस्तावेज धुंधले रूप में क्यों अपलोड किए गए? इन सवालों का जवाब अब केवल निष्पक्ष जांच ही दे सकती है।
