हजारों लोगों के लिए लगा विशाल सद्भावना भंडारा, भोजन के साथ परोसा गया अपनत्व और भाईचारे का संदेश
रेवांचल टाइम्स, मंडला। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मंडला जिला मुख्यालय में सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित विशाल सद्भावना भंडारे ने सेवा, सामाजिक एकता और भाईचारे की मिसाल पेश की। जिले के विभिन्न ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हजारों आदिवासी समाज के लोगों के लिए दुर्गावती स्मारक परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। लंबी दूरी तय कर कार्यक्रम में पहुंचे लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था आयोजकों द्वारा की गई थी। भंडारे में लोगों ने पंक्तिबद्ध होकर भोजन ग्रहण किया। इस दौरान आयोजन स्थल पर उत्साह और सामाजिक सद्भाव का वातावरण देखने को मिला।
भंडारे का उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सामाजिक एकता, सेवा और भाईचारे का संदेश देना भी रहा। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना था कि जिले के दूरदराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग इस अवसर पर जिला मुख्यालय पहुंचते हैं। ऐसे में उनके लिए भोजन और पानी जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं करना समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का एक छोटा सा प्रयास है।
इस सेवा कार्य में भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा एवं राष्ट्रीय मूलनिवासी क्षत्रिय महासंघ सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों का सहयोग और मार्गदर्शन रहा। संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई और भोजन वितरण से लेकर अन्य व्यवस्थाओं को संभाला।भंडारा कार्यक्रम को सफल बनाने में दशरथ धुर्वे, रामसिंह पंद्रे, पी.डी. खैरवार, दिनेश उईके, विष्णु पंद्रे, पुरुषोत्तम मरावी, केहर सैयाम, दीपक मार्को, शिव पंद्रो, नर्मदा बैरागी, अब्दुल कय्यूम अंसारी, विजय साहू सहित अनेक समाजसेवियों का सहयोग रहा। कार्यकर्ताओं ने मिलकर भोजन वितरण और आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित किया।आयोजकों ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, अस्मिता और अधिकारों की पहचान का प्रतीक है। इस दिन समाज के लोगों के बीच एकता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद को भोजन उपलब्ध कराना और थके हुए व्यक्ति को सहारा देना भी सामाजिक सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।दुर्गावती स्मारक में आयोजित इस भंडारे ने सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों के सहयोग की भावना को सामने रखा। हजारों लोगों की मौजूदगी और सामूहिक भोजन के दौरान दिखाई दी आत्मीयता ने यह संदेश दिया कि सेवा और सद्भावना समाज को जोड़ने का सबसे मजबूत माध्यम हैं।आयोजकों ने कहा कि मंडला की धरती हमेशा से सामाजिक समरसता, प्रकृति और आदिवासी संस्कृति के लिए जानी जाती रही है। ऐसे आयोजनों से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी भाईचारा और सहयोग की भावना मजबूत होती है।विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित यह विशाल सद्भावना भंडारा इसी सेवा भावना और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बनकर सामने आया।
