धार्मिक नगरी में धड़ल्ले से फल-फूल रहा अवैध शराब का काला कारोबार

Revanchal
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नर्मदा तट से पांच किलोमीटर के दायरे में बिक्री पर प्रतिबंध के दावों की खुली उड़ रही धज्जियां,

गली-मोहल्लों से लेकर होटल-ढाबों तक पहुंच रही शराब

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और मां नर्मदा की जीवन दायनी पवित्र धारा के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखने वाली मंडला नगरी में इन दिनों एक ऐसा कारोबार तेजी से पैर पसारता नजर आ रहा है, जो शासन-प्रशासन के तमाम दावों और प्रतिबंधों पर सवाल खड़े कर रहा है। शहर में कथित तौर पर अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि शहर के गली-मोहल्लों से लेकर प्रमुख चौराहों, होटल-ढाबों, किराना दुकानों, पान की गुमटियों और यहां तक कि अंडे की दुकानों तक शराब की अवैध बिक्री और परोसने का सिलसिला जारी है।
मंडला को धार्मिक नगरी के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है। मां नर्मदा शहर को तीन ओर से घेरे हुए हैं और वर्षभर श्रद्धालुओं का नर्मदा तट पर आना-जाना लगा रहता है। विशेषकर श्रावण मास में पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहता है। देश के अलग-अलग हिस्सों और प्रदेश के अन्य जिलों से श्रद्धालु मां नर्मदा के पावन तट पर पहुंचते हैं और नर्मदा स्नान कर धार्मिक स्थलों के दर्शन करते हैं। ऐसे पवित्र वातावरण में शराब की अवैध बिक्री का कारोबार प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
धार्मिक नगरी में शराब बिक्री पर प्रतिबंध, फिर भी कारोबार बेखौफ

मंडला की धार्मिक महत्ता को देखते हुए यहां शराब बिक्री को लेकर प्रतिबंधात्मक प्रावधानों की बात लंबे समय से सामने आती रही है। इसके अलावा नर्मदा नदी के तट से निर्धारित दूरी के दायरे में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध का प्रावधान भी बताया जाता है। बावजूद इसके स्थानीय स्तर पर यदि शराब खुलेआम उपलब्ध हो रही है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इन प्रतिबंधों का पालन कौन करा रहा है यदि शहर के भीतर शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है और शराब पीने वालों को दुकानों के अलावा अन्य स्थानों पर भी शराब मिल रही है, तो फिर जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
शहर के विभिन्न इलाकों में कथित रूप से अवैध शराब पहुंचाए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आरोप है कि शराब की बोतलें निर्धारित शराब दुकानों के बाहर भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। कई स्थानों पर कथित तौर पर दुकानों की आड़ में शराब बिक्री और सेवन की व्यवस्था तक कर दी जाती है।
किराना दुकान से गुमटी तक पहुंची शराब!

अवैध शराब कारोबार को लेकर सबसे गंभीर आरोप यह है कि शराब की बिक्री का नेटवर्क अब केवल शराब दुकानों तक सीमित नहीं रह गया है। सूत्रों के अनुसार शहर और आसपास के क्षेत्रों में कुछ किराना दुकानों, पान की गुमटियों, छोटे होटलों, ढाबों और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से भी कथित तौर पर शराब उपलब्ध कराई जा रही है। यह केवल आबकारी नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि शासन की शराब नियंत्रण व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभागों को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। और यदि जानकारी नहीं है तो फिर विभाग की मैदानी निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल

अवैध शराब के कारोबार को लेकर स्थानीय स्तर पर पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर कथित अवैध कारोबार बिना किसी संरक्षण या मिलीभगत के लंबे समय तक चल पाना मुश्किल है। शहर में खुलेआम अवैध शराब बिकने की शिकायतें सामने आ रही हैं तो जिम्मेदार विभागों को इनकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
आखिर सवाल यह भी है कि यदि विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है तो अवैध शराब की उपलब्धता कम क्यों नहीं हो रही। छोटी-मोटी कार्रवाई के बाद वही कारोबारी दोबारा सक्रिय कैसे हो जाते हैं

“कार्रवाई की जा रही है” तक सीमित जवाब!

जब अवैध शराब की बिक्री को लेकर आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी से बात की गई तो जवाब मिला कि “कार्रवाई की जा रही है।” विभाग का यह रटा-रटाया जवाब उन लोगों के लिए शायद पर्याप्त हो सकता है जो केवल कागजी कार्रवाई देखना चाहते हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग होने के आरोप हैं।
यदि कार्रवाई वास्तव में लगातार हो रही है तो फिर अवैध शराब का कारोबार खत्म क्यों नहीं हो रहा क्या कार्रवाई केवल कुछ बोतलें जब्त करने और प्रकरण दर्ज करने तक सीमित है क्या अवैध शराब की आपूर्ति करने वाले मुख्य लोगों तक विभाग पहुंच पा रहा है शराब की सप्लाई चेन कहां से शुरू होती है और कहां खत्म होती है, इसकी जांच क्यों नहीं होती।

छोटी मछलियों पर कार्रवाई, बड़े खिलाड़ियों पर मेहरबानी

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि अवैध शराब के मामले में छोटी-मोटी कार्रवाई कर खानापूर्ति की जाती है, जबकि कथित रूप से बड़े कारोबारियों और मुख्य सप्लाई नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
अवैध शराब का कारोबार किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं चलाया जा सकता। इसके पीछे शराब की सप्लाई, परिवहन, भंडारण और बिक्री का पूरा नेटवर्क होता है। ऐसे में केवल एक-दो स्थानों पर छापेमारी कर कुछ शराब जब्त कर लेना समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
प्रशासन को यह पता लगाना होगा कि शराब आखिर कहां से आ रही है, कौन पहुंचा रहा है, किन लोगों के माध्यम से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में वितरित हो रही है और किन स्थानों को कथित तौर पर बिक्री केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

नर्मदा की पवित्रता और प्रशासन की जिम्मेदारी

मां नर्मदा केवल एक नदी नहीं बल्कि लाखों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। मंडला में नर्मदा तटों पर धार्मिक गतिविधियां वर्षभर चलती रहती हैं। ऐसे में नर्मदा तट और धार्मिक क्षेत्रों के आसपास शराब की कथित उपलब्धता केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय भी है।विशेषकर श्रावण मास में जब श्रद्धालु बड़ी संख्या में नर्मदा तट पर पहुंच रहे हैं, तब प्रशासन को शराब की अवैध बिक्री के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है। केवल बयान और कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। धरातल पर सख्त कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।
क्या होगा अवैध कारोबार का अंत
सबसे बड़ा सवाल यही है कि

मंडला शहर में कथित रूप से फल-फूल रहे अवैध शराब कारोबार पर आखिर कब पूरी तरह रोक लगेगी क्या आबकारी विभाग और पुलिस संयुक्त अभियान चलाकर अवैध शराब के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करेंगे क्या केवल छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई होगी या शराब की सप्लाई करने वालों तक भी जांच पहुंचेगी
लोगों की मांग है कि प्रशासन धार्मिक नगरी की गरिमा और मां नर्मदा की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए अवैध शराब कारोबार के खिलाफ व्यापक अभियान चलाए। शहर के संवेदनशील और धार्मिक क्षेत्रों की विशेष निगरानी की जाए। होटल, ढाबे, किराना दुकान, पान गुमटी और अन्य संदिग्ध स्थानों की नियमित जांच हो तथा अवैध शराब की सप्लाई करने वाले मुख्य लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मुद्दे को केवल एक और शिकायत मानकर फाइलों में दबा देता है या फिर वास्तव में मैदान में उतरकर अवैध शराब के कथित नेटवर्क पर ऐसी कार्रवाई करता है, जिससे धार्मिक नगरी मंडला में अवैध शराब कारोबार पर पूरी तरह लगाम लग सके।

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