दैनिक रेवाँचल टाईम्स – हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शिवरात्रि मनाई जाती है फाल्गुन और श्रावण मास की शिवरात्रि का विशेष फलदाई माना गया है इस बार श्रावण मास की शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 दिन मंगलवार को मनाई जाएगी
शिव चतुर्दशी का अर्थ
शिव भगवान शिव का अर्थ कल्याणकारी मंगलकारी और समस्त विघ्न व सीमाओं को पार करने वाला
चतुर्दशी का अर्थ
हिंदू पंचांग के अनुसार मास के कृष्ण पक्ष की 14वीं तिथि यह तिथि भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है
भक्त दिन भर उपवास रखते हैं रात के समय शिवजी का अभिषेक और विशेष पूजन किया जाता है संपूर्ण दिन और रात्रि के समय ओम नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का रुद्राक्ष माला से जप करना चाहिए चतुर्दशी की रात सोना नहीं चाहिए बल्कि भगवान शिव के भजन कीर्तन व जागरण में समय व्यतीत करना चाहिए
शिव पुराण के अनुसार इस दिन विधि विधान से शिव आराधना करने से समस्त पापों का नाश होता है और मनोकामना पूर्ण होती है जल एवं पंचामृत से भगवान को स्नान कर कर बिली पत्र धतूरा भांग शमी पत्र सफेद चंदन सफेद मदार के पुष्प धूप दीप निवेद अर्पण करना चाहिए
सावन शिवरात्रि पर चार पहर की पूजा का महत्व
पहले पहर की पूजा का समय शाम 7 :04 से रात 9:45 तक
दूसरे पहर की पूजा का समय रात 9:45 से 12:26 तक
तीसरे प्रहर की पूजा का समय रात 12:26 से सुबह 3:07 तक
चौथे पहर की पूजा का समय 3:07 से सुबह 5 :49 तक
शिवरात्रि पर रात्रि के चारों प्रहार में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष विधान होता है भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है मन को शांति मिलती है बुरे विचार और पाप दूर होते हैं तथा घर में सकारात्मक आती है!
शिव पुराण के अनुसार चित्र भानु की कथा
वाराणसी के पास एक बहेलिया था जिसका नाम चित्र भानु था वह जानवरों को मारकर अपना परिवार चलता था एक बार वह शिकार की तलाश में जंगल गया रात हो गई तो वह बेल के पेड़ पर बैठ गया और नीचे अपना शिकार बांध दिया जागते रहने के लिए वह बेलपत्र तोड़कर नीचे फेंकता रहा पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था जिस पर वे बेलपत्र गिरते रहे पूरा दिन भूखा प्यासा रहने और परिवार की चिंता में उसके नेत्रों से आंसू बह जो शिवलिंग पर गिरते रहे इस तरह उसका उपवास रात्रि जागरण और बेलपत्र अर्पण अनजाने में पूरा हो गया सुबह होने पर जब उसने गर्भवती हिरणी को छोड़ा और सत्य का पालन किया तो भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे दिव्य ज्ञान और मोक्ष प्रदान किया !
