आखिर नही हो सकी कार्यवाही, अवैध दुकान निर्माण पर नैनपुर प्रशासन की खामोशी क्यों? शिकायतें होती रहीं, कार्रवाई कागजों में सिमटती रही!

Revanchal
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एसडीएम से लेकर नगर पालिका तक जिम्मेदार मौन, बीच बाजार में धड़ल्ले से निर्माण—आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल?

दैनिक रेवांचल टाइम्स – नैनपुर।नैनपुर नगर में अवैध निर्माण का मामला अब केवल एक दुकान या एक निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल नगर पालिका परिषद और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो गया है। जब शिकायतें लगातार पहुंच रही हैं, मौके पर अवैध निर्माण दिखाई दे रहा है और बीच बाजार में जेसीबी तक चल रही है, तो जिम्मेदार अधिकारी आखिर कर क्या रहे हैं?

नगर पालिका परिषद नैनपुर के लोक निर्माण विभाग से लेकर राजस्व अमले और नैनपुर एसडीएम कार्यालय तक शिकायतें पहुंचने के बावजूद यदि निर्माण कार्य जारी रहता है, तो आम जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या शिकायतों का उद्देश्य केवल कागजों का पेट भरना रह गया है?

शिकायत करो और भूल जाओ—क्या यही बन गई है प्रशासन की कार्यप्रणाली?
नगर के लोगों का कहना है कि शिकायत करने में कोई कमी नहीं है। आवेदन दिए जाते हैं, अधिकारियों को जानकारी दी जाती है, मौके की स्थिति बताई जाती है, लेकिन इसके बाद क्या कार्रवाई हुई—यह बताने वाला कोई नहीं।

यही कारण है कि अब जनता के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि शिकायत करना जनता की जिम्मेदारी है और कार्रवाई करना शायद किसी की जिम्मेदारी नहीं!

यदि किसी अवैध निर्माण की शिकायत के बाद निर्माण रुकता नहीं, बल्कि और तेजी से आगे बढ़ता है, तो सवाल सिर्फ निर्माणकर्ता पर नहीं बल्कि उस पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर उठता है, जिसके सामने कथित अवैध निर्माण होने के बावजूद कार्रवाई दिखाई नहीं देती।

बीच बाजार में निर्माण, फिर भी जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं?

नैनपुर के व्यस्त बाजार क्षेत्र में दुकान निर्माण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि निर्माण के दौरान जेसीबी का उपयोग किया गया और इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है—

क्या नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों को निर्माण की जानकारी नहीं थी?यदि जानकारी थी तो निर्माण रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए?यदि निर्माण अवैध था तो अब तक क्या कार्रवाई हुई?और यदि निर्माण वैध है तो उसकी अनुमति, नक्शा और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते?
जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं, रिकॉर्ड पर जवाब चाहिए।

नगर पालिका की भूमिका पर भी बड़ा सवाल

नगर पालिका परिषद नैनपुर के लोक निर्माण विभाग की भूमिका भी जांच के घेरे में है। आखिर नगर में होने वाले निर्माणों की निगरानी कौन करता है? अवैध निर्माण की सूचना मिलने के बाद स्थल निरीक्षण कौन करता है? नोटिस जारी हुआ या नहीं? निर्माण रोकने का आदेश हुआ या नहीं? और यदि कार्रवाई हुई तो उसका पंचनामा, आदेश और वर्तमान स्थिति क्या है?
यदि कार्रवाई नहीं हुई तो किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई?

इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।

कच्ची दुकानों पर कार्रवाई और बड़े निर्माणों पर चुप्पी क्यों?
नगर में छोटे और कमजोर तबके से जुड़े निर्माणों पर यदि तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन बाजार क्षेत्र में प्रभावशाली लोगों के निर्माण पर प्रशासनिक मशीनरी की गति अचानक धीमी पड़ जाती है, तो यह व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

जनता पूछ रही है कि कानून सबके लिए बराबर है या कार्रवाई भी हैसियत देखकर तय होती है?
अगर नगर पालिका और राजस्व विभाग की नजर में कोई निर्माण नियम विरुद्ध है तो बिना किसी दबाव के तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। और यदि निर्माण नियमों के अनुरूप है तो प्रशासन को दस्तावेज सार्वजनिक कर भ्रम दूर करना चाहिए।

एसडीएम नैनपुर से जनता का सीधा सवाल

नैनपुर एसडीएम से अब जनता जानना चाहती है कि शिकायत के बाद संबंधित प्रकरण में क्या कार्रवाई हुई?

क्या मौके का निरीक्षण कराया गया?क्या नगर पालिका से रिपोर्ट मांगी गई?क्या निर्माण की वैधता जांची गई?क्या कोई नोटिस जारी हुआ?क्या निर्माण रोकने के निर्देश दिए गए?और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई?

क्योंकि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल शिकायत लेना नहीं, बल्कि शिकायत का निष्पक्ष निराकरण और उसकी जानकारी शिकायतकर्ता को देना भी है।

अब सवाल संरक्षण का नहीं, पारदर्शिता का है
अवैध निर्माण को लेकर किसी अधिकारी पर सीधे आरोप लगाने से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन परिस्थितियां इतनी जरूर पूछ रही हैं कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है तो जांच से डर कैसा?
नगर पालिका और राजस्व विभाग को चाहिए कि संबंधित निर्माण की अनुमति, नक्शा, भूमि की स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करे।

क्योंकि यदि कार्रवाई हुई है तो वह रिकॉर्ड में होनी चाहिए और यदि कार्रवाई नहीं हुई है तो उसकी वजह भी रिकॉर्ड में होनी चाहिए।
जनता का काम शिकायत करना भर नहीं है। जनता यह भी जानना चाहती है कि उसकी शिकायत का हुआ क्या?
अब समय आ गया है कि नैनपुर नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर जमीन पर कार्रवाई दिखाए। वरना लगातार सामने आ रहे अवैध निर्माणों के बीच प्रशासन की खामोशी को लेकर उठ रहे सवाल और गहरे होते जाएंगे।
वही अब सवाल सीधा है—शिकायत जनता करती रहे, निर्माण होता रहे और जिम्मेदार विभाग मौन रहे, तो आखिर नैनपुर में नियम-कायदे किसके लिए हैं?

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