स्वच्छ वायु हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार: रेलवे स्टेशन नरसिंहपुर में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस

Revanchal
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रेलवे यात्रियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति किया जागरूक

दैनिक रेवांचल टाइम्स – नरसिंहपुर।
नीले आसमान के लिए स्वच्छ वायु के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर सोमवार, 7 सितंबर 2026 को रेलवे स्टेशन नरसिंहपुर में वायु प्रदूषण के प्रति जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्रियों, रेलवे कर्मचारियों एवं अधिकारियों को वायु प्रदूषण के कारणों, उससे होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसान तथा प्रदूषण को कम करने के उपायों के बारे में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान रेलवे स्टेशन पर अनाउंसमेंट के माध्यम से भी यात्रियों को स्वच्छ वायु के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। रेलवे चिकित्सक डॉ. आर. आर. कुर्रे एवं जिला अस्पताल से एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. गुलाब खातरकर ने उपस्थित लोगों को वायु प्रदूषण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

रेलवे चिकित्सक डॉ. आर. आर. कुर्रे ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, रासायनिक, भौतिक एवं जैविक कारकों के कारण घर के अंदर अथवा बाहर की हवा का सांस लेने के लिए असुरक्षित हो जाना वायु प्रदूषण कहलाता है। प्रदूषित हवा में मौजूद अत्यंत सूक्ष्म कण सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंचते हैं और वहां से रक्त में प्रवेश कर शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है तथा यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकता है।

उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण में कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, ओजोन तथा ईंधन, पेंट और सॉल्वेंट से निकलने वाले वाष्प जैसे प्रदूषक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वाहनों से निकलने वाला धुआं और धूल प्रमुख स्रोत

डॉ. कुर्रे ने बताया कि वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, कारखानों से निकलने वाला धुआं, सड़क निर्माण के दौरान उड़ने वाली धूल, कोयला आधारित बिजली संयंत्र तथा खेतों में पराली जलाना प्रमुख हैं। इन स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषक वातावरण की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं और मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अनावश्यक रूप से वाहन का उपयोग न करें, वाहनों की नियमित सर्विस कराएं, खुले में कचरा एवं अन्य सामग्री न जलाएं तथा धूल एवं धुएं को कम करने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करें।

99 प्रतिशत लोग प्रदूषित हवा में ले रहे हैं सांस

जागरूकता कार्यक्रम में बताया गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में बाहरी वायु प्रदूषण के कारण विश्व स्तर पर लगभग 42 लाख लोगों की समय से पहले मृत्यु हुई। वहीं, WHO के अनुसार विश्व की लगभग 99 प्रतिशत आबादी ऐसी हवा में सांस लेती है, जो निर्धारित वायु गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है।

वक्ताओं ने कहा कि वायु प्रदूषण केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण से भी है। इसलिए वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रयासों को एक साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है।

सरकार, उद्योग और नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के लिए सरकार, उद्योग जगत और आम नागरिकों को मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे। केवल सरकारी प्रयासों से वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान संभव नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव कर प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डॉ. आर. आर. कुर्रे ने कहा कि “स्वच्छ वायु हर व्यक्ति का, हर जगह मौलिक अधिकार है। वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई साथ-साथ करनी होगी। सरकार, उद्योग और नागरिकों की सामूहिक कार्रवाई से ही स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण का निर्माण संभव है। हर छोटा स्थानीय प्रयास हमें स्वस्थ, स्वच्छ और नीले आसमान की ओर ले जाता है।”

कार्यक्रम के दौरान रेलवे कर्मचारियों, अधिकारियों एवं प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों ने स्वच्छ वायु एवं प्रदूषण नियंत्रण के प्रति जागरूक रहने तथा अपने स्तर पर आवश्यक प्रयास करने का संकल्प लिया।

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