रेवांचल टाइम्स, जबलपुर:
मानवता, करुणा और साहस की मिसाल बनते हुए जबलपुर निवासी 31 वर्षीय सत्येंद्र यादव ने अपनी मृत्यु के बाद भी दो जिंदगियों को जीवनदान दिया। एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद ब्रेन डेड घोषित किए गए सत्येंद्र के परिवार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए उनके अंगों का दान करने का निर्णय लिया।
एक हादसा, एक साहसिक निर्णय
गढ़ा क्षेत्र में गैस सिलिंडर सप्लाई का कार्य करते हुए एक सड़क हादसे में घायल सत्येंद्र यादव को 5 अगस्त को सुपर स्पेशलिटी मेडिकल कॉलेज जबलपुर में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने अथक प्रयासों के बाद उन्हें 6 अगस्त की रात ब्रेन डेड घोषित किया।
परिवार ने दिखाया अद्भुत साहस और संवेदनशीलता
इस कठिन घड़ी में भी सत्येंद्र यादव के परिवार ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए उनका हार्ट और लिवर दान करने का निश्चय किया।
लिवर को भोपाल के एक मरीज के लिए
हार्ट को अहमदाबाद भेजा गया है
इन अंगों की सुरक्षित और तेज़ी से डिलीवरी के लिए प्रशासन द्वारा 11:30 बजे ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण किया गया।
ग्रीन कॉरिडोर बना जीवन की राह
ऑर्गन ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसलिए सत्येंद्र के अंगों को समय पर संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने मिलकर एक स्पेशल ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिसमें एम्बुलेंस बिना किसी रुकावट के गंतव्य तक पहुंच सकी।
समाज के लिए प्रेरणा बने सत्येंद्र और उनका परिवार
सत्येंद्र यादव के इस योगदान ने यह सिद्ध कर दिया कि जीवन का मूल्य सिर्फ जीते जी ही नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी हो सकता है। उनका यह फैसला हजारों लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करेगा और समाज में जागरूकता की लहर को गति देगा।
