जबलपुर में सट्टा पर दोहरी मार: छोटे सटोरियों की शामत, बड़े माफियाओं को सलामत!”
“पुलिस का शिकंजा गरीबों पर, रईसों से दोस्ती? जनता पूछ रही है—सट्टे के खेल में कौन है असली खिलाड़ी!”
दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर
जबलपुर शहर में सट्टा कारोबार को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। जनता का कहना है कि पुलिस प्रशासन द्वारा केवल छोटे-मोटे सटोरियों को पकड़कर कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े सट्टा कारोबारियों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है। ऐसे में आम लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या पुलिस की हमदर्दी केवल रसूखदारों के साथ है? क्या इसके पीछे कोई ‘सेटिंगबाजी’ चल रही है?
शहर के कई इलाकों में खुलेआम सट्टा चलने की खबरें हैं। लेकिन पुलिस की कार्रवाई सिर्फ उन्हीं पर केंद्रित दिख रही है जो आर्थिक या राजनीतिक रूप से कमजोर हैं। वहीं, जिनके नाम शहर के बड़े सट्टा नेटवर्क से जुड़े हैं, उन पर न तो कोई खुली कार्रवाई होती है, और न ही उनके ठिकानों पर छापेमारी की खबरें सामने आती हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली सटोरियों की पुलिस के साथ ‘सैटिंग’ है, जिसके चलते उन्हें हर बार कार्रवाई से बचा लिया जाता है। कई मामलों में तो यह भी देखा गया है कि सूचना देने के बावजूद भी पुलिस टाल-मटोल करती है या नाम मात्र की कार्रवाई करके खानापूर्ति कर देती है।
जनता पूछ रही है सवाल:
आखिर बड़े सट्टा माफियाओं पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
क्या पुलिस और इन माफियाओं के बीच कोई अघोषित समझौता है?
छोटे सटोरियों को पकड़कर पुलिस किसे दिखाना चाहती है कि वह कार्रवाई कर रही है?
क्या इस तरीके से शासन को गुमराह किया जा रहा है?
राजनीतिक संरक्षण की भी चर्चा:
शहर में यह भी चर्चा है कि कई बड़े सट्टा कारोबारी राजनीतिक पहुंच रखते हैं और उनका रसूख इतना ज्यादा है कि प्रशासन भी उन पर हाथ डालने से कतराता है। यही कारण है कि उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती और सट्टे का यह अवैध धंधा लगातार फल-फूल रहा है।

जनता मांग रही है निष्पक्ष जांच:
जनता की मांग है कि सट्टा कारोबार पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, ताकि छोटे-बड़े सभी दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जा सके। यदि पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, तो उसकी भी उच्च स्तर पर जांच होनी चाहिए।
जबलपुर में सट्टा कारोबार के खिलाफ उठती जनता की आवाज़ अब प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। अगर पुलिस वाकई में शहर को सट्टे से मुक्त कराना चाहती है, तो उसे बिना भेदभाव के कार्रवाई करनी होगी — चाहे वो छोटा सटोरी हो या बड़ा माफिया।
