पन्ना। प्राचीन खेजड़ा मंदिर में विजयादशमी के अवसर पर सदियों पुरानी परंपरा का विधिवत निर्वहन किया गया। इस दौरान महाराजा छत्रसाल के वंशज पन्ना नरेश छत्रसाल द्वितीय को मंदिर के पुजारी द्वारा दिव्य तलवार, पान व बीरा भेंट किए गए।
तिलक व तलवार भेंट के साथ ही मंदिर परिसर “प्राणनाथ प्यारे” और “महाराजा छत्रसाल अमर रहें” के जयघोषों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक अवसर पर राजघराने के सदस्य, बुंदेला समाज, धामी समाज के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
चार शताब्दियों पुरानी परंपरा
मालूम हो कि लगभग 400 वर्ष पूर्व महामति प्राणनाथ जी ने महाराजा छत्रसाल को दिव्य तलवार और बीरा भेंट कर विजय का आशीर्वाद दिया था। उसी तलवार से छत्रसाल जी ने 52 युद्ध मुगलों के विरुद्ध जीते थे।

तब से हर वर्ष दशहरा पर पन्ना नरेश को यह दिव्य प्रतीक भेंट करने की परंपरा निभाई जाती है, जो बुंदेलखंड की वीरता, आस्था और परंपरा का प्रतीक बन चुकी है।
