डिंडोरी में RTI कानून की खुलेआम अनदेखी

Revanchal
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जवाब के इंतज़ार में भटकते आवेदक, भ्रष्टाचार छुपाने के आरोप

रेवांचल टाइम्स | डिंडोरी : सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 आम नागरिकों को शासन–प्रशासन से जवाब मांगने का सशक्त अधिकार देता है, लेकिन डिंडोरी जिले में यह कानून केवल कागज़ों तक सीमित होता दिखाई दे रहा है।

जिला स्तर के कई शासकीय विभाग RTI नियमों की खुली अवहेलना कर रहे हैं और आवेदकों को 30 दिन की निर्धारित समय-सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही। समय बीत जाने के बाद न तो सूचना दी जाती है, न ही कोई लिखित जवाब या अस्वीकृति—जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

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RTI आवेदकों का कहना है कि आवेदन लगाने के बाद महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई अधिकारी या तो “फाइल लंबित है” का बहाना बनाते हैं या सीधे बात करने से ही बचते हैं।

हालात ऐसे हो गए हैं कि आवेदक न्याय पाने के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भटकने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि जिन मामलों में भ्रष्टाचार या गड़बड़ी उजागर होने की संभावना है, उन्हीं मामलों में जानबूझकर सूचना रोकी जा रही है ताकि सच्चाई सामने न आ सके।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ अधिकारी वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं, जिससे जवाबदेही कमजोर होती जा रही है। “अंगद के पैर” की तरह जमे ये अधिकारी न कानून से डरते हैं, न ही उच्च अधिकारियों की फटकार से। नतीजा यह है कि RTI जैसे संवैधानिक अधिकार को मज़ाक समझ लिया गया है।

RTI अधिनियम के तहत यदि 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो संबंधित जनसूचना अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये के हिसाब से दंड लगाया जा सकता है। साथ ही विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। इसके बावजूद डिंडोरी में नियमों का पालन न होना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है।

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RTI कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि जिले में सूचना मांगने वालों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सूचना रोकने की प्रवृत्ति भी उसी अनुपात में तेज़ हुई है। इससे प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सूचना आयोग से मांग की है कि लगातार हो रही अनदेखी पर कड़ी कार्रवाई हो, दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जाए और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

डिंडोरी के ये हालात साफ संकेत देते हैं कि कानून तभी प्रभावी होगा जब उसे ईमानदारी से लागू किया जाएगा। वरना सूचना का अधिकार जनता के लिए अधिकार कम और सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

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