मुलभूत सुविधाएं से वंचित बैगा वनग्राम न सड़क न पानी और न ही मिल रही मजदूरी

जगमंडल अंजानिया वन समितियों में मशीनीकरण का खुला खेल — मजदूरों से छिन रहा रोजगार, बढ़ रहा भ्रष्टाचार परिक्षेत्र अधिकारी के तालमेल से बैगा जनजाति परेशान

रेवांचल टाइम्स — मंडला। आदिवासी बहुल जिला मंडला, जो अपनी समृद्ध वन संपदा और वन ग्रामों में निवासरत बैगा आदिवासियों की आजीविका के लिए जाना जाता है, वहां वन विभाग के कथित भ्रष्टाचार ने ग्रामीणों के सामने रोजगार का संकट खड़ा कर दिया है।

वन समितियों के तहत बनने वाले विकास कार्यों में मजदूरों की जगह जेसीबी और मशीनों का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है, जबकि नियम साफ तौर पर ऐसे कार्यों को स्थानीय श्रमिकों के माध्यम से कराने का प्रावधान करते हैं।

स्थानीय आदिवासियों को नहीं मिल रहा काम — बीट गार्ड पर गंभीर आरोप

सूत्रों के अनुसार, वन परिक्षेत्र जंगमंडल (सामान्य पूर्व वनमंडल मंडला) के अंतर्गत काष्ठ लाभांश योजना में ग्राम खर्राझर, ग्राम पंचायत भावमाल (जनपद पंचायत बिछिया) में लगभग ₹5,75,000 की लागत से नाला निर्माण का कार्य चल रहा है।
लेकिन इस कार्य में ग्रामीणों को रोजगार देने के बजाय जेसीबी मशीनों का प्रयोग प्राथमिकता से किया जा रहा है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी वे काम मांगने जाते हैं, बीट गार्ड भांडे उन्हें धमकाकर भगा देता है और साफ कह देता है—
“तुम्हारे लिए कोई काम नहीं… भागो यहां से।”

काष्ठ लाभांश की राशि का नियम अनुसार वितरण, लेकिन विकास कार्यों में अनियमितता

काष्ठ लाभांश योजना के तहत:


50% राशि सीधे ग्रामवासियों को ई-पेमेंट के माध्यम से वितरित की जानी चाहिए,जिसमें प्रत्येक 18 वर्ष से ऊपर के सदस्य को लाभ मिलता है।25% राशि वानिकी और विकास कार्यों के लिए होती है, जिनमें ठूठ ड्रेसिंग और नाला निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं।

लेकिन ग्राम खर्राझर बीट में इन विकास कार्यों में मशीनों का प्रयोग होने से ग्रामीणों को संदेह है कि अधिकारियों की मिलीभगत से कमीशन का खेल चल रहा है।

बीट चार्ज व्यवस्था पर भी उठे सवाल

जानकारी के अनुसार:
बीट गार्ड भांडे दो बीटों — खर्राझर और मुगली — का चार्ज संभाल रहा है।
जबकि बीट गार्ड टीकाराम उइके को केवल खर्राझर बीट का चार्ज दिया गया है, लेकिन समिति का चार्ज अभी भी भांडे के पास ही है, जिससे अनियमितताओं की आशंका और बढ़ रही है।

ग्रामीणों में आक्रोश, वन विभाग की भूमिका संदेह घेरे में परिक्षेत्र अधिकारी मौन

वही ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने वनों की सुरक्षा, रोजगार और स्थानीय आदिवासियों को मजबूती देने के उद्देश्य से काष्ठ लाभांश योजना लागू की थी। लेकिन वन कर्मियों के ‘निजी स्वार्थ’ और ‘कमीशनखोरी’ के कारण:


रोजगार छीना जा रहा है,ग्रामीण पलायन के कगार पर हैं,मशीनों से काम करवाकर नियमों की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से जांच की मांग की है।


जिससे बैगा बाहुल्य क्षेत्र खर्राझर में निवासरत ने जिला मुख्यालय में बैठे जिम्मेदार एस ड़ी ओ साहब और वनक्षेत्राधिकारी से मांग की है सरकार से जो काम हमें मिलाना था वह कार्य को मजदूरों न करते हुए जे सी बी मशीन और अन्य मशीनों से किया गया है

हम गरीब कार्य के लिए कहा जाये बीट गार्ड भांडे और डिप्टी रेंजर्स धुर्वे ने अपने निजी स्वार्थो के कारण मजदूरों से न काम करवाकर मशीन से काम करवा कर ज्यादा से ज्यादा पैसा बचाये लिए है !

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