अपीलीय अधिकारी एवं एडिशनल कमिश्नर मनोज कुमार श्रीवास्तव ने लगाई विभागों की क्लास, कहा— 30 दिन में दें जवाब, नहीं तो होगी कार्रवाई
दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर। नगर निगम जबलपुर में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत गुरुवार को आयोजित प्रथम अपीलों की सुनवाई के दौरान अपीलीय अधिकारी एवं एडिशनल कमिश्नर मनोज कुमार श्रीवास्तव ने आरटीआई प्रकरणों में लगातार बरती जा रही लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए कई विभागों के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम को हल्के में लेने की प्रवृत्ति तत्काल बंद की जाए। भविष्य में समय-सीमा का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ वेतन कटौती जैसे कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं।
प्रथम अपील की सुनवाई में सामने आया कि नगर निगम के अनेक विभाग आरटीआई अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का गंभीरता से पालन नहीं कर रहे हैं। कई मामलों में आवेदकों को 30 दिन की निर्धारित समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय दो-दो, तीन-तीन और चार-चार माह बाद जवाब दिया गया। कई प्रकरणों में तो अपील की सुनवाई तक भी संबंधित विभाग संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं कर सके।
सुनवाई के दौरान संपदा विभाग, राजस्व विभाग, भवन शाखा सहित अन्य विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे। अपीलीय अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से विलंब का कारण पूछा, लेकिन अधिकांश मामलों में अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस पर एडिशनल कमिश्नर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि नागरिकों के वैधानिक अधिकारों की भी अनदेखी है।
उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 7(1) के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में प्रत्येक आरटीआई आवेदन का निराकरण 30 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य है। समय-सीमा का पालन न करना अधिनियम की भावना के विपरीत है और इससे शासन की पारदर्शिता एवं जवाबदेही प्रभावित होती है।
सुनवाई के दौरान श्रीवास्तव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी आरटीआई आवेदन किसी टेबल, फाइल या लंबित सूची में धूल न खाए। प्रत्येक आवेदन को प्राथमिकता के आधार पर दर्ज कर समय-सीमा के भीतर उसका निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकती है तो अधिनियम के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाए, लेकिन अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अपीलीय अधिकारी ने यह भी निर्देशित किया कि भविष्य में प्रथम अपील की सुनवाई के दौरान संबंधित विभाग का जिम्मेदार अधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेगा। अनुपस्थिति या बिना तैयारी के सुनवाई में आने की स्थिति को भी गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए कि लंबित आरटीआई प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें तथा समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करें।
बैठक के दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की आधारशिला है। अधिकारी इसे औपचारिक प्रक्रिया न समझें, बल्कि नागरिकों के अधिकार के रूप में देखें। भविष्य में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा लापरवाही बरती गई तो उससे व्यक्तिगत रूप से जवाब-तलब किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार विभागीय कार्रवाई एवं वेतन कटौती जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।
नगर निगम मुख्यालय में हुई इस कार्रवाई के बाद अधिकारियों एवं कर्मचारियों में गंभीरता का माहौल देखा गया। प्रशासन की इस सख्ती को नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और आरटीआई व्यवस्था को प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्पष्ट संकेत दे दिए गए हैं कि अब सूचना का अधिकार अधिनियम की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के प्रति नरमी नहीं बरती जाएगी और प्रत्येक विभाग को कानून के अनुसार समयबद्ध कार्य करना होगा।
