NEET परीक्षा विवाद और 36 दिन तक चले छात्र आंदोलन के बाद बड़ा राजनीतिक फैसला, सरकार ने सौंपा नई जिम्मेदारी
नई दिल्ली, 25 जुलाई।
देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पिछले कई सप्ताह से चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनके इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके वर्तमान मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। इस संबंध में राष्ट्रपति भवन और प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की ओर से आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की गई।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब देशभर में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर छात्रों, युवाओं और विभिन्न संगठनों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के कई शहरों में प्रदर्शन हुए, जिनमें शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। आंदोलन लगातार 36 दिनों तक चला और सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ता गया।
प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार ने वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है। जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार भी संभाल रहे हैं। अब वे इन मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त दायित्व भी निभाएंगे।
सरकार का संदेश
सरकार के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने और छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक रोकने और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए आगे भी आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठनों ने इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी जीत बताया। कई छात्र संगठनों ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और अब परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार सुनिश्चित किए जाने चाहिए। वहीं, सरकार समर्थक पक्ष का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
