अतिक्रमण हटाया, लेकिन रोजगार का क्या? घुघरी में कार्रवाई के बाद ठेला-रेहड़ी वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट

Revanchal
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स्थानीय प्रशासन की पहल सराहनीय, लेकिन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर उठ रहे सवाल


रेवांचल टाइम्स मंडला – तहसील मुख्यालय घुघरी में हाल ही में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा जनपद रोड और बस स्टैंड क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। प्रशासन का उद्देश्य यातायात व्यवस्था सुधारना, आमजन को सुविधा देना और सार्वजनिक मार्गों को अतिक्रमण मुक्त करना था। कार्रवाई के बाद सड़कें तो खुल गईं, लेकिन अब एक नया सवाल खड़ा हो गया है—आखिर उन रेहड़ी, ठेला और फुटपाथ व्यवसायियों का क्या होगा जिनकी रोजी-रोटी इसी स्थान से चलती थी?


वर्षों से छोटे-मोटे व्यापार के माध्यम से अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले कई लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के बाद उनकी आय का मुख्य स्रोत बंद हो गया है। प्रशासन द्वारा वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन प्रभावित लोगों का आरोप है कि जिन स्थानों पर उन्हें भेजा गया है वहां न पर्याप्त आवागमन है और न ही ग्राहक पहुंच रहे हैं।


व्यापारियों का कहना है कि यदि ग्राहक ही नहीं आएंगे तो दुकान लगाने का क्या लाभ? ऐसे में उनके सामने परिवार चलाने, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।


कार्रवाई तो हुई, लेकिन योजना कहां है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अतिक्रमण हटाने से पहले इन छोटे व्यापारियों के पुनर्वास की ठोस योजना बनाई गई थी? यदि प्रशासन सड़कें खाली कराना चाहता है तो यह भी सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है कि प्रभावित लोगों के सामने भुखमरी की स्थिति न बने।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास और व्यवस्था जरूरी है, लेकिन गरीबों की आजीविका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। केवल अतिक्रमण हटाकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।


उठ रहे बड़े सवाल
क्या अतिक्रमण हटाने से पहले प्रभावित परिवारों का सर्वे किया गया था?
क्या रेहड़ी और ठेला व्यवसायियों के लिए स्थायी व व्यवस्थित बाजार की व्यवस्था है?
जिन स्थानों पर व्यापारियों को भेजा गया है, वहां ग्राहकों की पहुंच सुनिश्चित करने की कोई योजना है?
क्या प्रशासन रोजगार छिनने वाले परिवारों के पुनर्वास की जिम्मेदारी लेगा?

जनता की मांग

प्रभावित व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन शीघ्र ही ऐसे स्थान चिन्हित करे जहां व्यापारियों को पर्याप्त ग्राहक मिल सकें। साथ ही एक व्यवस्थित वेंडिंग जोन या स्थायी बाजार विकसित किया जाए ताकि यातायात व्यवस्था भी बनी रहे और गरीब परिवारों की रोजी-रोटी भी सुरक्षित रह सके।
अतिक्रमण हटाना प्रशासनिक सफलता हो सकती है, लेकिन यदि इसके कारण सैकड़ों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है तो पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था करना भी प्रशासन की उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है। विकास तभी सार्थक होगा जब व्यवस्था के साथ-साथ लोगों का जीवन और रोजगार भी सुरक्षित रहे।

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