रेवांचल टाइम छिंदवाड़ा
किसान नेता संजय पटेल ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस नगर अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनू मांगो का बयान उनकी राजनीतिक हताशा और खेती-किसानी के प्रति उनकी सीमित समझ को उजागर करता है। किसानों के नाम पर बयान देना आसान है, लेकिन किसान की पीड़ा, उसके संघर्ष और उसके श्रम को समझने के लिए खेत की मिट्टी से जुड़ना पड़ता है। खेती-किसानी खेत में होती है, प्रेस विज्ञप्तियों, राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप में नहीं।
किसान नेता संजय पटेल ने कहा कि कांग्रेस नगर अध्यक्ष को यह समझना चाहिए कि खेती-किसानी कोई शराब व्यवसाय नहीं है, जहां पानी मिलाकर मुनाफा बढ़ा लिया जाए। शराब के कारोबार में मात्रा बढ़ाने और लाभ कमाने की मानसिकता हो सकती है, लेकिन खेती में ऐसा कोई शॉर्टकट नहीं होता। खेती प्रकृति, मौसम, पानी, मिट्टी और किसान के अथक परिश्रम पर आधारित व्यवस्था है
उन्होंने कहा कि खेती-किसानी कोई व्यवसाय मात्र नहीं, बल्कि पीढ़ियों की तपस्या, परिश्रम, संस्कार और मिट्टी से जुड़ा जीवन दर्शन है। एक किसान अपने खेत को केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के रूप में संवारता है। खेत की मेड़ पर बहाया गया पसीना, परिवार की पीढ़ियों की मेहनत और धरती माता के प्रति समर्पण ही कृषि की वास्तविक पूंजी है। इसलिए खेती-किसानी के महत्व और किसान के संघर्ष को वही समझ सकता है, जिसने खेत की मिट्टी की खुशबू और किसान के पसीने का मूल्य जाना हो। दुर्भाग्य से यह संवेदना एक शराब व्यवसायी कभी समझ ही नहीं सकता।
पटेल ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में किसानों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी। उस समय किसानों को कृषि ऋण पर 18 प्रतिशत तक ब्याज देना पड़ता था, जिससे अनेक किसान कर्ज के बोझ तले दब जाते थे। हालात इतने गंभीर थे कि कर्ज नहीं चुका पाने की स्थिति में किसानों, चाहे वे आदिवासी किसान ही क्यों न हों, की जमीनें तक नीलाम कर दी जाती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में किसानों की जमीनें मनमाने और औने-पौने दामों पर कांग्रेस से जुड़े लोगों द्वारा खरीद ली जाती थीं।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और खेती को लाभ का धंधा बनाने के उद्देश्य से अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। आज किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उन्हें साहूकारों और महंगे कर्ज से राहत मिली है। सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, फसल बीमा, समर्थन मूल्य और किसान कल्याण की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। आज स्थिति यह है कि किसी भी किसान को कर्ज के कारण अपनी जमीन नीलाम होने का भय नहीं रहता और सरकार किसान की सुरक्षा तथा सम्मान के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है।
पटेल ने कहा कि किसान बीज बोने से लेकर फसल कटाई तक हर कदम पर जोखिम उठाता है। कभी सूखा उसकी उम्मीदों को तोड़ देता है, कभी अतिवृष्टि उसकी मेहनत पर पानी फेर देती है, तो कभी बाजार की परिस्थितियां उसे चुनौती देती हैं। इसके बावजूद किसान अपने श्रम, धैर्य और संकल्प से देश के अन्न भंडार भरने का काम करता है। खेती से प्राप्त उपज में पानी मिलाकर पैसा नहीं बनाया जाता, बल्कि पानी की हर बूंद के लिए किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखता है और अपने पसीने की हर बूंद बहाकर अन्न पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नगर अध्यक्ष ने अपने राजनीतिक आकाओं की स्वामी भक्ति में ऊटपटांग, तथ्यहीन और गैर-जिम्मेदाराना बयान जारी कर न केवल भाजपा नेताओं पर अनर्गल आरोप लगाए हैं, बल्कि देश के अन्नदाताओं का भी अपमान किया है। किसानों के श्रम, त्याग और सम्मान पर की गई ऐसी टिप्पणियां किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। अन्नदाता का अपमान केवल किसानों का नहीं, बल्कि उस संस्कृति का अपमान है जो धरती को मां और किसान को देश का पालनहार मानती है। ऐसे बयान किसानों की भावनाओं को आहत करते हैं और इन्हें कभी माफ नहीं किया जा सकता।
पटेल ने कहा कि यदि खाद वितरण या कृषि व्यवस्था को लेकर कहीं कोई शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी होनी चाहिए। लेकिन बिना तथ्यों और प्रमाणों के केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए बयान देना किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं है। किसान सब देख रहा है और वह भली-भांति जानता है कि कौन उसके सुख-दुख में उसके साथ खड़ा है और कौन केवल उसके नाम पर राजनीति कर रहा है।
