रेवांचल टाइम्स, मंडला।
दैनिक रेवांचल टाइम्स द्वारा बंद ऋतु के दौरान खुलेआम हो रहे अवैध मत्स्याखेट और बाजारों में बिक रही मछलियों का मामला प्रमुखता से उठाए जाने के बाद आखिरकार मत्स्य विभाग की नींद खुलती नजर आई। विभागीय टीम ने कारीकोन तिराहा, महाराजपुर, आमानाला बायपास और झूला पुल क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए लगभग 12 किलोग्राम अवैध मछली जब्त की तथा नीलामी से प्राप्त ₹1,000 शासकीय कोष में जमा कराए।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा 15 जून से 15 अगस्त तक मछलियों के प्रजनन काल को देखते हुए मत्स्याखेट और मछली विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद मंडला सहित जिले के कई कस्बों और साप्ताहिक बाजारों में खुलेआम मछली बिक रही है।
ऐसे में विभाग की यह कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है। जब प्रतिबंध के दौरान हर दिन बाजारों में मछली उपलब्ध है, तो आखिर यह मछलियां आ कहां से रही हैं? यदि नियम लागू हैं, तो फिर उनका पालन कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई केवल शहर तक सीमित न रहकर बम्हनी, घुघरी, बिछिया, निवास, बीजाडांडी, नारायणगंज मोहगांव सहित अन्य क्षेत्रों के बाजारों में भी नियमित और औचक जांच होनी चाहिए। तभी अवैध मत्स्याखेट पर प्रभावी रोक लग सकेगी। अन्यथा ऐसी कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
12 किलो में पूरी हो गई जिम्मेदारी, अब विभाग फिर आराम फरमाएगा!
“खबर छपी… विभाग जागा… 12 किलो मछली पकड़ी… फोटो खिंची… प्रेस नोट जारी हुआ… और फिर सब शांत!”
लगता है मत्स्य विभाग ने अन्य विभागों जैसा ही कार्रवाई का नया फार्मूला खोज लिया है—”बाजार में टनों मछली बिके तो बिके, लेकिन 12 किलो पकड़ लो, जिम्मेदारी पूरी मान लो।”
प्रजनन काल में मत्स्य खोट पर पूर्णतः प्रतिबंध है, लेकिन बाजारों में मछलियां ऐसे बिक रही हैं जैसे सरकार ने नहीं बल्कि विभाग ने ही छूट दे रखी हो। सवाल यह नहीं कि 12 किलो मछली पकड़ी गई, सवाल यह है कि बाकी मछलियां किस अदृश्य नदी से निकलकर बाजार पहुंच रही हैं?
यदि विभाग की गाड़ी केवल खबर छपने के बाद ही स्टार्ट होती है, तो फिर जनता पूछ रही है—क्या अवैध मत्स्याखेट रोकने की जिम्मेदारी विभाग की है या अखबार की?
जब तक कार्रवाई केवल शहर की सड़कों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित रहेगी, तब तक अवैध कारोबार करने वालों के चेहरे पर डर नहीं, बल्कि मुस्कान ही दिखाई देगी। जरूरत 12 किलो मछली पकड़ने की नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क पर लगातार और निष्पक्ष कार्रवाई की है। तभी बंद ऋतु का उद्देश्य सफल होगा, अन्यथा पिछले वर्षों जैसा ही प्रतिबंध केवल कागजों में रहेगा और मछलियां बाजार में।
