संविदा तकनीकी सहायक को चार पहिया वाहन की पात्रता नहीं, फिर भी लाखों का भुगतान

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मण्डला।जिले के कृषि विभाग में वित्तीय अनियमितताओं और कथित घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसके ऊपर डिंडोरी जिले में में भ्रष्टाचार और ग़बन के आरोप लग चुके जिसकी जाच जबलपुर की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो कर रही है और वह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि मंडला में भ्रष्टाचार ग़बन और वित्तीय अनिमित्त्य आते ही शुरू करने की जानकारी प्राप्त हो रही है, वहीं जानकारी के अनुसार ताजा मामला विभाग में पदस्थ एक संविदा तकनीकी सहायक से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोप है कि प्रभारी उपसंचालक कृषि अश्वनी झारिया द्वारा नियमों के विपरीत चार पहिया वाहनों के फर्जी भ्रमण बिल लगाकर भुगतान किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार संबंधित संविदा तकनीकी सहायक को शासन द्वारा निर्धारित मानदेय के साथ केवल दोपहिया वाहन से भ्रमण करने की अनुमति दी गई है। नियमों के तहत ऐसे कर्मचारियों को अधिकतम 1500 रुपये प्रतिमाह भ्रमण भत्ता दिया जाता है, ताकि वे क्षेत्रीय कार्यों के लिए दोपहिया वाहन का उपयोग कर सकें। लेकिन विभागीय अभिलेखों में चार पहिया वाहन से भ्रमण दर्शाते हुए भारी भरकम बिल लगाए जाने और उनका भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।
बताया जा रहा है कि संबंधित तकनीकी सहायक कार्यालय में ही पदस्थ है और शाखा प्रभारी के रूप में कार्य कर रहा है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब वह अधिकांश समय कार्यालय में ही रहता है और सीमित ही भ्रमण करता है, तो फिर चार पहिया वाहन से लंबी दूरी के भ्रमण के बिल किस आधार पर लगाए गए।
सूत्रों के अनुसार कृषि विभाग के कार्यालय में पहले से ही दो शासकीय चार पहिया वाहन उपलब्ध हैं, इसके बावजूद निजी चार पहिया वाहनों के नाम पर बिल लगाकर भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर और भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि अरविंद वर्मा, सहायक संचालक कृषि के नाम पर भी चार पहिया वाहनों के फर्जी बिल लगाकर भुगतान किया गया है। वहीं आर.के. मंडाले, कृषि विस्तार अधिकारी को भी इसी तरह के भ्रमण बिलों के माध्यम से लाखों रुपये का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। 💸
सूत्रों का कहना है कि फर्जी भ्रमण दर्शाकर लाखों रुपये के बिल तैयार किए गए और विभागीय स्तर पर उन्हें पास कर भुगतान भी कर दिया गया। इस पूरे मामले में प्रभारी उपसंचालक कृषि अश्वनी झारिया की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामले के सामने आने के बाद कृषि विभाग की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगाई गई तो शासन की योजनाओं का लाभ आम किसानों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाएगा।
