दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला/कोरबा: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल के निवासियों के लिए एक अत्यंत सुखद और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। बीते 8 जुलाई 2026 को स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी की कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत जी के साथ महत्वपूर्ण दूरभाष चर्चा हुई।
प्रमुख चर्चा के बिंदु:
इस गंभीर और सकारात्मक चर्चा के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण मांगों पर विस्तृत विमर्श किया गया:
1.नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर: आदिवासी क्षेत्रों के विकास और कनेक्टिविटी को देखते हुए इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा हुई, FLS स्वकृति प्रदान करने के लिए।
2.बिलासपुर-मंडला-जबलपुर रेल लाइन: वर्षों पुरानी इस बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना को गति देने हेतु चर्चा की गई।
3. 230 किमी मिसिंग लिंक (पंडरिया-बिछिया-मंडला-बीजाडांडी- ग्वारीघाट): सांसद महोदया के समक्ष इस महत्वपूर्ण कड़ी के लिए मानसून सत्र में लोकसभा में आवाज उठाने का आग्रह किया गया। विशेष रूप से इसके लिए पुनरिक्षण सर्वेक्षण (Updated Traffic Survey) और बजट आवंटन की मांग प्रमुखता से रखी गई।जो 2012-13 में होना था वो आज तक नहीं हुआ.
विधानसभा में अशासकीय संकल्प: नितिन सोलंकी ने सांसद को अवगत कराया कि मध्य प्रदेश विधानसभा के माध्यम से ‘अशासकीय संकल्प’ पारित कराकर केंद्र सरकार को भेजने का प्रयास किया जा रहा है। इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ के कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव जी से चर्चा के दौरान पूरी बात बताई है और व्हाट्सएप के माध्यम से संदेश भेजा गया है और पूरा विश्वास दिलाया है कि हम करेंगे, सभी के प्रयास से विधानसभा में भी प्रयास करने का सुझाव दिया गया, जिसके लिए संबंधित ड्राफ्ट भी प्रदान कर दिया गया है।
सांसद का सकारात्मक रुख:
कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत जी ने पूरे विषय को गंभीरता से सुना और इस पर पूर्ण सहमति जताते हुए आश्वासन दिया कि वे मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाएंगी। उन्होंने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए इस रेल मार्ग की अनिवार्यता को स्वीकार किया।
एक्टिविस्ट का पक्ष:
नितिन सोलंकी ने कहा, “यह रेल मार्ग केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि इस अंचल में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक विकास की मुख्य धुरी साबित होगा।” चर्चा के उपरांत, सभी आवश्यक तकनीकी पहलुओं और प्रस्तावों को विस्तृत दस्तावेज के रूप में सांसद महोदया को व्हाट्सएप के माध्यम से साझा कर दिया गया है।
यह पहल अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही है, जिससे ‘नर्मदा-मैकलसुता-भोरमदेव रेल कॉरिडोर’ के सपने के साकार होने की उम्मीदें प्रबल हो गई हैं।

