बिना अनुमति मेन रोड पर लगा टेंट, छात्रों की पढ़ाई हुई प्रभावित, अब प्रशासन की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स डिंडोरी। जिले में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक आदेशों की पालना को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डिण्डौरी द्वारा जारी आदेश क्रमांक डी.एम./एस.डब्ल्यू./2025/295 दिनांक 18 दिसंबर 2025 के बावजूद 15 जुलाई 2026 को उत्कृष्ट विद्यालय के मुख्य द्वार के सामने भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। आरोप है कि यह आयोजन बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के किया गया, जिससे न केवल यातायात व्यवस्था चरमरा गई, बल्कि स्कूली विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई।



कलेक्टर कार्यालय द्वारा पूर्व में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि संयुक्त जिला कार्यालय भवन के सामने तथा आसपास के क्षेत्रों में धरना-प्रदर्शन, आमरण अनशन और अन्य राजनीतिक गतिविधियों पर रोक रहेगी। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया था कि सभी सामाजिक, राजनीतिक एवं अन्य संगठनों के लिए बिरसा मुंडा स्टेडियम ग्राउंड, पुरानी डिण्डौरी को धरना-प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थल के रूप में निर्धारित किया गया है।
इसके बावजूद भाजपा युवा मोर्चा द्वारा उत्कृष्ट विद्यालय के सामने मुख्य मार्ग पर टेंट लगाकर प्रदर्शन करने से लगभग तीन घंटे तक यातायात बाधित रहा। प्रदर्शन के दौरान आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, वहीं स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी असुविधा झेलनी पड़ी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जिला प्रशासन ने स्वयं आदेश जारी कर वैकल्पिक स्थान निर्धारित कर दिया था, तो फिर आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी अन्य सामाजिक संगठन द्वारा ऐसा किया जाता, तो प्रशासन तत्काल कार्रवाई करता।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि कार्यक्रम के आयोजन में उपयोग की गई टेंट सामग्री जब्त कर आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता का कानून और प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास बना रहे। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता है तो इसे पक्षपातपूर्ण रवैये के रूप में देखा जाएगा।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह अपने ही आदेशों का सम्मान कर निष्पक्ष कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा। प्रशासन की आगामी कार्रवाई यह तय करेगी कि जिले में कानून सबके लिए बराबर है या नहीं।
