दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग। जनपद क्षेत्र के सुनियामार के समीप बहने वाली बोन्दर नदी के दोनों तटों पर लंबे समय से ईंट निर्माण और भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। इस क्षेत्र में कई वर्षों से बड़े पैमाने पर ईंट बनाने का कार्य जारी है, जहां लाखों की संख्या में कच्ची ईंटें तैयार कर उन्हें पकाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भट्ठों के संचालन में पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा, जिससे नदी और आसपास का प्राकृतिक वातावरण प्रभावित हो रहा है।
भीषण गर्मी के बीच बोन्दर नदी का जलस्तर लगातार घटता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी किनारे बड़ी संख्या में संचालित हो रहे भट्ठों से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। इससे आसपास के क्षेत्र में वायु गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और लोगों को सांस संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। नदी किनारे फैला निर्माण और भट्ठों से निकलने वाली राख एवं अपशिष्ट सामग्री पर्यावरण के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार ईंट पकाने में बड़ी मात्रा में ईंधन का उपयोग किया जाता है, जिससे हरित क्षेत्र और प्राकृतिक संतुलन पर भी असर पड़ता है। लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ते भट्ठों के कारण क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जानकारों के मुताबिक ईंट भट्ठों के संचालन के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेना आवश्यक होता है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और वायु प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों के तहत निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य है। भट्ठों में स्वीकृत तकनीक प्रणाली का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि धुआं और प्रदूषण कम हो सके। साथ ही कोयला, एवं बबूल और अन्य प्रजाति की लकड़ियों से ईट पकाने का कार्य किया जा रहा है।
नदी, तालाब और अन्य जलस्रोतों के आसपास संचालन को लेकर भी कई दिशा-निर्देश निर्धारित हैं, जिनका पालन आवश्यक बताया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से पूरे मामले की जांच कर पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में बोन्दर नदी और आसपास गंभीर पर्यावरण संकट उत्पन्न हो सकता है
