अवैध कॉलोनाइजिंग का तथ्य छिपाकर दिया गलत प्रतिवेदन, पटवारी निलंबित; सवाल—क्या बिना अधिकारियों की अनदेखी के संभव है ऐसा खेल?
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।
नैनपुर अनुभाग में अवैध कॉलोनाइजिंग से जुड़े नामांतरण प्रकरण में तत्कालीन पटवारी अनिल तिवारी के निलंबन ने एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसे भ्रष्ट और लापरवाह कर्मचारी कब तक मनमानी करते रहेंगे? यदि शिकायत नहीं होती तो क्या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता?
कलेक्टर मंडला राहुल धोटे को प्राप्त शिकायत के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नैनपुर द्वारा कराई गई जांच में सामने आया कि संबंधित भूमि पर अवैध कॉलोनाइजिंग और अवैध प्लॉटिंग का मामला पहले से अपर कलेक्टर न्यायालय में विचाराधीन था। इसके बावजूद तत्कालीन पटवारी ने अपने प्रतिवेदन में इस महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाते हुए नामांतरण के पक्ष में रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी।
जांच में स्पष्ट हुआ कि यह केवल साधारण चूक नहीं, बल्कि शासकीय दायित्वों के प्रति गंभीर लापरवाही और तथ्य छिपाकर भ्रामक प्रतिवेदन देने का मामला था। इसके बाद एसडीएम आशुतोष ठाकुर ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से पटवारी को निलंबित कर दिया।
लेकिन इस कार्रवाई के साथ कई गंभीर प्रश्न भी खड़े हो गए हैं। जब भूमि पर अवैध कॉलोनाइजिंग का मामला न्यायालय में विचाराधीन था, तब नामांतरण की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ी? क्या केवल पटवारी ही जिम्मेदार है, या फिर पूरी राजस्व श्रृंखला की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए? यदि शिकायतकर्ता सामने नहीं आता, तो क्या यह अनियमितता कभी उजागर हो पाती?
जिले में यह पहला मामला नहीं है, जहां शिकायत के बाद ही कार्रवाई हुई हो। इससे यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि कुछ कर्मचारी प्रशासनिक कार्रवाई के भय से मुक्त होकर कार्य कर रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल निलंबन ही पर्याप्त नहीं, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि गलत प्रतिवेदन से किसे लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया और इसमें अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
प्रशासन से अपेक्षा है कि इस मामले को केवल एक कर्मचारी तक सीमित न रखकर पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर दोषी सभी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में कोई भी शासकीय कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर जनता और शासन के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।
