जबलपुर में दो रात, दो बमबाजी और एक नाम… शराब कारोबार की जंग या किसी बड़ी साजिश की आहट? पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल… पीड़ित कौन, आरोपी कौन?

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर। शहर में महज 24 घंटे के भीतर हुई दो बमबाजी की घटनाओं ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शराब कारोबार से जुड़े विवादों की परतें भी खोलनी शुरू कर दी हैं। पहली घटना तिलवारा थाना क्षेत्र में हुई, जहां एक सामाजिक कार्यकर्ता के घर पर सूअरमार बम फेंके गए और उसकी गाड़ी में तोड़फोड़ की गई। दूसरी घटना अगले ही दिन गोरखपुर थाना क्षेत्र में शराब ठेकेदार आशीष शिवहरे के कार्यालय के बाहर हुई, जहां एक के बाद एक पांच बम फेंके जाने का मामला सामने आया।
इन दोनों घटनाओं के केंद्र में एक नाम बार-बार सामने आ रहा है…आशीष शिवहरे। हालांकि पुलिस फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और पूरे घटनाक्रम की हर संभावना की गहन जांच कर रही है।
पहली घटना: शराब सिंडीकेट के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत?
25 जून की रात तिलवारा थाना क्षेत्र स्थित आयुषीधरा कॉलोनी में रहने वाले राधेश्याम झारिया के घर के बाहर तीन बदमाश पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बदमाशों ने पहले गाली-गलौज करते हुए राधेश्याम को बाहर निकलने के लिए ललकारा और फिर घर के सामने सूअरमार बम फेंक दिए। धमाकों से इलाके में दहशत फैल गई। बाहर खड़ी थार गाड़ी के शीशे चकनाचूर हो गए। ईंटें भी गाड़ी के अंदर मिलीं। पड़ोसी के मकान और वाहन को भी नुकसान पहुंचा।
राधेश्याम झारिया का आरोप है कि वह लंबे समय से शराब सिंडीकेट और शराब कारोबार में कथित अनियमितताओं को उजागर कर रहा है। उसका कहना है कि पहले उसे चुप रहने के लिए प्रलोभन दिए गए और जब वह नहीं माना तो डराने के उद्देश्य से यह हमला कराया गया। उसने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे शराब ठेकेदार आशीष शिवहरे का नाम लेते हुए पुलिस को बयान दिया है।
राधेश्याम का कहना है कि यदि घर पर लगा शटर न होता तो बम सीधे घर के भीतर गिर सकते थे, जिससे परिवार और बच्चों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।
दूसरी घटना: इस बार निशाने पर शराब कारोबारी का कार्यालय
पहली घटना के अगले ही दिन यानी 26 जून की देर रात गोरखपुर थाना क्षेत्र में शराब कारोबारी आशीष शिवहरे के कार्यालय के बाहर पांच बम फेंके जाने की शिकायत दर्ज हुई। धमाकों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। पुलिस मौके पर पहुंची तो बम के अवशेषों के साथ एक सक्रिय बम भी बरामद हुआ, जिसे बाद में निष्क्रिय कराया गया।
घटना के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। एक संदेही नाबालिग को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
आशीष शिवहरे के मैनेजर अशोक मिश्रा ने पुलिस के सामने आर्यन चौधरी, श्रेयांश त्रिपाठी और अरमान के नाम लिए हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोग झूठी शिकायतें और ज्ञापन देकर शराब कारोबार को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं तथा कथित रूप से अवैध वसूली और मुफ्त शराब की मांग पूरी न होने पर इस तरह की घटनाएं कराई जा रही हैं।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती
इन दोनों घटनाओं ने जांच एजेंसियों के सामने एक जटिल स्थिति खड़ी कर दी है। एक ओर राधेश्याम झारिया स्वयं को शराब माफिया के खिलाफ आवाज उठाने वाला पीड़ित बता रहे हैं, तो दूसरी ओर शराब कारोबारी पक्ष खुद को हमले का शिकार बता रहा है।
यानी सवाल केवल बम फेंकने वालों की गिरफ्तारी का नहीं है, बल्कि यह पता लगाने का भी है कि आखिर इन घटनाओं के पीछे वास्तविक वजह क्या है? क्या यह शराब कारोबार में वर्चस्व की लड़ाई है? क्या किसी को डराने की कोशिश की गई? या फिर दोनों घटनाएं किसी बड़े षड्यंत्र की कड़ी हैं?
पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
तिलवारा थाना प्रभारी ब्रजेश मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध, आरोप-प्रत्यारोप, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयानों का मिलान किया जा रहा है।
फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में जांच यह तय करेगी कि इन धमाकों के पीछे आखिर सच क्या है और आरोपों में कितनी सच्चाई है।
आरती लोधी

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