खेती की जमीन पर अवैध कॉलोनियों का खेल! प्रशासन की चुप्पी से कॉलोनाइजर मालामाल, गरीबों के सपनों पर बुलडोजर?

Revanchal
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बिना डायवर्जन, बिना टीएनसीपी अनुमति और बिना ले-आउट स्वीकृति के धड़ल्ले से काटे जा रहे प्लॉट, जांच रिपोर्ट में भी खुलासा फिर भी कार्रवाई नहीं

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला
मंडला जिले में अवैध कॉलोनियों का कारोबार अब किसी से छिपा नहीं है। खेती योग्य भूमि खरीदकर उसे छोटे-छोटे प्लॉटों में बदलने और लाखों रुपये में बेचने का खेल खुलेआम चल रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायतें हुईं, जांच हुई, राजस्व विभाग ने मौके पर जाकर रिपोर्ट भी सौंप दी और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि भी हो गई, तब आखिर प्रशासन की कार्रवाई आज तक क्यों नहीं हुई?


आपके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज बताते हैं कि ग्राम आमाडोंगरी, तहसील निवास में कृषि भूमि के प्लॉट काटकर बेचे जाने की शिकायत पर राजस्व विभाग ने जांच की। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि संबंधित भूमि पर बिना भूमि डायवर्जन, बिना टीएनसीपी (Town & Country Planning) की अनुमति तथा बिना स्वीकृत ले-आउट के प्लॉटों का विक्रय किया जा रहा है। मौके पर सड़क, नाली, पेयजल, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं पाई गईं, फिर भी कई लोगों को प्लॉट बेचे जा चुके हैं।


जांच में खुलासा, लेकिन कार्रवाई गायब
दस्तावेजों के अनुसार जांच दल ने पाया कि कृषि भूमि को अवैध रूप से कॉलोनी का स्वरूप देकर कम से कम सात लोगों को प्लॉट बेचे गए। संबंधित व्यक्तियों से अनुमति और दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बावजूद अब तक किसी कठोर कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने नहीं आया।


कानून क्या कहता है?
मध्यप्रदेश में कृषि भूमि को कॉलोनी के रूप में विकसित करने के लिए विभिन्न वैधानिक प्रक्रियाएं अनिवार्य हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—
भूमि का वैध डायवर्जन (भू-उपयोग परिवर्तन),
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) की स्वीकृति (जहां लागू हो),
स्वीकृत ले-आउट प्लान,


तथा अन्य आवश्यक राजस्व एवं स्थानीय निकायों की अनुमतियां शामिल हैं।
यदि इन प्रक्रियाओं के बिना प्लॉट काटकर बेचे जाते हैं, तो खरीदार भविष्य में सड़क, बिजली, पानी, नामांतरण, भवन अनुमति जैसी अनेक कानूनी समस्याओं में फंस सकते हैं।


गरीबों के सपनों से खिलवाड़?
एक ओर आम नागरिक जीवनभर की पूंजी लगाकर अपने परिवार के लिए छोटा-सा आशियाना बनाने का सपना देखता है, वहीं दूसरी ओर यदि बिना वैधानिक अनुमति वाले प्लॉट बेचे जा रहे हैं तो सबसे बड़ा नुकसान उसी खरीदार को उठाना पड़ सकता है। सवाल यह भी है कि जब संबंधित विभागों को शिकायतें और जांच रिपोर्ट मिल चुकी हैं, तब ऐसे मामलों पर प्रभावी कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?


जिम्मेदारों से सवाल
जब जांच रिपोर्ट में नियमों के उल्लंघन का उल्लेख है तो कार्रवाई क्यों नहीं?
अवैध कॉलोनियां विकसित होने तक प्रशासन क्या करता रहा?
क्या ऐसे मामलों में खरीदारों के हितों की रक्षा की जाएगी?
क्या जिले में संचालित अन्य कॉलोनियों की भी व्यापक जांच होगी?


जनहित में मांग
जिले में संचालित सभी निजी कॉलोनियों की निष्पक्ष जांच कर यह सार्वजनिक किया जाए कि किन कॉलोनियों के पास वैध अनुमति है और किनके पास नहीं। साथ ही जिन लोगों ने बिना अनुमति प्लॉट बेचे हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कर खरीदारों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

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