शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूल, फिर भी संलग्नीकरण का खेल जारी होने के लगाए जा रहे है गंभीर आरोप
रेवांचल टाइम्स मंडला –एक ओर शासन द्वारा शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विकासखंड घुघरी में शिक्षकों के संलग्नीकरण को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र के कई विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, इसके बावजूद शिक्षकों को अन्यत्र संलग्न कर कार्य लिए जाने की चर्चाएं तेज हैं।
ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि जिन विद्यालयों में पहले से पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, वहां से भी शिक्षकों को संलग्न कर दिया गया है। इससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब स्कूलों में शिक्षकों की कमी है तो आखिर किस आधार पर संलग्नीकरण किया जा रहा है? क्या ऐसे आदेश सक्षम स्तर से जारी हुए हैं या फिर स्थानीय स्तर पर मनमाने तरीके से व्यवस्था संचालित की जा रही है?
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ शिक्षकों को विद्यालयी कार्यों से हटाकर अन्य दायित्वों में लगाया गया है, जबकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में अभिभावक पूछ रहे हैं कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की जिम्मेदारी कौन लेगा?
उठ रहे प्रमुख सवाल
विकासखंड घुघरी में वर्तमान में कितने शिक्षक संलग्न हैं?
किन आदेशों के तहत उनका संलग्नीकरण किया गया?
क्या संलग्नीकरण से पूर्व संबंधित विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता का आकलन किया गया?
जिन स्कूलों में शिक्षक कम हैं, वहां पढ़ाई की व्यवस्था कैसे संचालित हो रही है?
क्या शिक्षा विभाग इस पूरे मामले की जांच कराएगा?
अभिभावकों की मांग
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि घुघरी क्षेत्र में किए गए सभी संलग्नीकरणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है वहां तत्काल शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करता है या फिर बच्चों की शिक्षा पर उठ रहे सवाल यूं ही बने रहेंगे!
