रेवांचल टाइम्स | नैनपुर, मंडला
क्या मंडला जिले के नैनपुर में अब शासकीय अभिलेखों में दर्ज नदी भी खरीदी-बेची जा सकती है? क्या राजस्व विभाग की आंखों के सामने नियम-कानून दम तोड़ चुके हैं? ग्राम पंचायत निवारी से सामने आया मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
उपलब्ध खसरा अभिलेख में खसरा क्रमांक 349/4/1/1/1/1/1/2 का भूमि स्वरूप “नदी” दर्ज है। यदि इसके बावजूद इसी भूमि का पंजीयन और नामांतरण हुआ है, तो यह सिर्फ एक फाइल की गलती नहीं, बल्कि पूरे राजस्व तंत्र की जवाबदेही का मामला है।

सबसे बड़ा सवाल हल्का पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और एसडीएम नैनपुर से है। आखिर नामांतरण करते समय अभिलेख देखे गए थे या नहीं? यदि देखे गए थे, तो “नदी” दर्ज भूमि पर प्रक्रिया कैसे पूरी हुई? और यदि नहीं देखे गए, तो इतनी गंभीर लापरवाही के जिम्मेदार कौन हैं?
नैनपुर और आसपास के क्षेत्रों में वर्षों से अवैध कॉलोनियों की शिकायतें उठती रही हैं। लोगों का आरोप है कि नियमों की धज्जियां उड़ाकर प्लॉटिंग की जा रही है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस और कागजी खानापूर्ति होती है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अवैध कॉलोनाइजरों के हौसले इसलिए बुलंद हैं क्योंकि उन्हें कार्रवाई का डर ही नहीं है?
यह भी जांच का विषय है कि यदि किसी सार्वजनिक या शासकीय प्रकृति की भूमि का निजी लेन-देन हुआ है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कहीं किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या अधिकारियों की लापरवाही तो नहीं हुई।
जनता पूछ रही है—
क्या नैनपुर में कानून से ऊपर कॉलोनाइजर हो गए हैं?
क्या राजस्व विभाग सिर्फ कागजों में ही नियम लागू करता है?
क्या तहसीलदार और एसडीएम पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे?
यदि अनियमितता सिद्ध होती है, तो क्या संबंधित अधिकारियों और दोषी व्यक्तियों पर एफआईआर और विभागीय कार्रवाई होगी?
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनपुर जनपद की ग्राम पंचायत निवारी के खसरा क्रमांक 349/4/1/1/1/1/1/2 की खसरा नकल में भूमि का प्रकार “नदी” दर्ज है। इसके बावजूद यदि इसी भूमि की रजिस्ट्री और नामांतरण हुआ है, तो यह पूरे राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंजीयन और नामांतरण के समय संबंधित अधिकारियों ने अभिलेखों का परीक्षण किया था या नहीं? यदि भूमि वास्तव में नदी के रूप में दर्ज थी, तो किस कानूनी प्रावधान के तहत यह प्रक्रिया पूरी हुई?
प्रशासन से सवाल
क्या एसडीएम नैनपुर संबंधित पटवारी, राजस्व निरीक्षक और अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच करेंगे?
यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों पर कार्रवाई होगी?
क्या अब कलेक्टर मंडला को इस मामले में तत्काल उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए। यदि खसरे में “नदी” दर्ज भूमि पर नियमों के विपरीत कोई प्रक्रिया हुई है, तो जिम्मेदारों को बचाने के बजाय उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि यदि आज नदी पर सवाल नहीं उठे, तो कल नाले, तालाब और अन्य शासकीय भूमि भी निजी संपत्ति में बदलती चली जाएंगी।
प्रशासन को यह तय करना होगा कि कानून का राज चलेगा या प्रभावशाली लोगों की मनमानी। अब मौन नहीं, कार्रवाई चाहिए।
