मंडला के मवई प्रकृति की गोद में बसा, पर विकास से कोषों दूर प्रशासन और जनप्रतिनिधि गैर जिम्मेदार

kaonebroadcast@gmail.com
28
9 Min Read

रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिला जो कि भारत के हृदय स्थल मध्यप्रदेश की छत्तीसगढ़ सीमा से सटा एक सुंदर लेकिन उपेक्षित जिला है। जहाँ पर केवल सरकारी योजनाओं में अधिकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधि लोगों के को मिलने वाली मुलभूत सुविधाएं में भ्रष्टाचार ग़बन और पद का दुरुपयोग कर अपना और अपने चहेतों का जेब और घर भर रहे है और बेचारे भोलेभाले ग़रीब आज भी मुलभूत सुविधाएं से वंचित नज़र आ रहे है।
वही जिले के सबसे पिछड़े विकास खण्ड मवई जहाँ इस स्थान पर आज भी निवासरत ग्रामीणों को अच्छी शिक्षा अच्छे स्वास्थ्य सुविधाएं और सड़के बिजली पानी जैसी व्यवस्था से वंचित हैं। और मवई जहां एक तरफ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, घने साल के जंगल, पहाड़ों की गोद में बसी बस्तियां और शुद्ध वातावरण इसकी पहचान है। छत्तीसगढ़ राज्य के कवर्धा जिले से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित यह क्षेत्र मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा को जोड़ता है। लेकिन जितना यह क्षेत्र सुंदर है, उतनी ही गहरी इसकी समस्याएं हैं।

वन संपदा और प्राकृतिक सौंदर्य की मिसाल विकास शून्य

वही मवई चारों ओर से हरे-भरे जंगलों और पहाड़ों से घिरा हुआ है। साल, सागौन, बीजा, तेंदू जैसे बहुमूल्य वृक्षों से समृद्ध यह क्षेत्र वनांचल की असली तस्वीर प्रस्तुत करता है। यहां का शांत वातावरण, स्वच्छ हवा और जीव-जंतुओं की विविधता इसे एक आदर्श पर्यावरणीय क्षेत्र बनाते हैं। यह इलाका जैविक खेती और इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं भी समेटे हुए है।

कभी यह क्षेत्र “अंतिम छोर” कहलाता था, लेकिन अब यह जिला मुख्यालय से सड़क मार्ग से जुड़ चुका है। फिर भी, बरसात के मौसम में यह संपर्क टूट जाता है। विशेष रूप से नेशनल हाईवे तीस पर स्थित मोतीनाला मार्ग जो डिंडोरी और अमरकंटक को जोड़ता है। मानसून में पूरी तरह बंद हो जाता है। छत्तीसगढ़ की ओर जाने वाले पहाड़ी रास्तों पर भी भारी वाहनों और बसों का संचालन बंद हो जाता है।

Mandla's Mawai is situated in the lap of nature, but the administration is far away from development
Mandla’s Mawai is situated in the lap of nature, but the administration is far away from development

यदि ये मार्ग साल भर सुचारु रूप से खुले रहें और पक्की सड़कों से जुड़े रहें, तो यह मवई को विकास की मुख्य धारा से जोड़ सकता है। इससे न केवल व्यापारिक लाभ होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार जैसी मूलभूत सुविधाएं भी सुलभ होंगी।

लोगों की आर्थिक हालात खराब लोग पलायन की मजबूरी

वही इस क्षेत्र में ग्रामीणों के पास आय के साधन नही वह केवल खेती पर ही निर्भर रहते है और खेती बाड़ी करने के बाद यहां के लोग आज भी अपनी आजीविका के लिए मुख्य रूप से जंगलों और वर्षा पर आधारित कृषि पर निर्भर हैं। सिंचाई की सुविधा का भारी अभाव है, जहा पर न कोई नहर है और नही डेम बनाया गया है जिससे कि किसानो को समय समय पर पानी की सुविधाएं मिल सके जिस कारण से किसान केवल एक ही फसल ले पाते हैं वह भी प्रकृति की कृपा पर निर्भर होकर। यहां की प्रमुख फसलें धान, कोदो, कुटकी, मक्का और कुछ हद तक राहर हैं। लेकिन कम उपज और बाजार की पहुंच न होने के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।

वन उपज – जैसे तेंदूपत्ता, साल बीज, महुआ, चिरौंजी और चाकोड़ा – इनकी कमाई का बड़ा स्रोत हैं। परंतु इनकी खरीदी भी बिचौलियों के हाथों में है, जो मेहनत के बदले बहुत कम दाम देते हैं। रोजगार की कमी और सरकारी योजनाओं की निष्क्रियता के कारण आज इस क्षेत्र से भारी पलायन हो रहा है। लोग परिवार सहित केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मजदूरी के लिए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लोगों को 100 दिन का काम मिलने की गारंटी है, लेकिन यहां यह योजना मात्र कागजों में सीमित रह गई है। कुछेक जगहों पर खानापूरी के लिए गड्ढे खोदने या सड़क मरम्मत जैसे काम होते हैं, लेकिन ज़्यादातर लोगों को काम नहीं मिल पाता।

स्वास्थ्य सेवाएं के लिए भवन हैं, पर डॉक्टर नहीं व्यवस्था ग़ायब

वही मवई क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और उप-स्वास्थ्य केंद्र तो कई ग्रामो पर बनाये गए हैं, पर अधिकांश भवन बनकर ही रह गए हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी है। जहाँ ज़रूरत के समय एम्बुलेंस नहीं आती, और मरीजों को 50-60 किलोमीटर दूर जाकर इलाज कराना पड़ता है। कई गरीब परिवार आर्थिक अभाव के चलते इलाज नहीं करा पाते और छोटी-छोटी बीमारियों से जान गंवा देते हैं।

मातृ स्वास्थ्य, बच्चों का टीकाकरण, प्रसव सुविधा, और इमरजेंसी सेवाएं जैसे ज़रूरी स्वास्थ्य लाभ यहां केवल सरकारी रिपोर्टों में दर्ज हैं, ज़मीनी हकीकत में नहीं।

स्वास्थ्य शिक्षा स्कूल हैं, पर कर्मचारी शिक्षक नहीं

वही मवई मंडला मुख्यालय से लगभग 100 की की दूरी पर है और छत्तीसगढ़ से सीमा लगी हुई हैं इस क्षेत्र के बच्चों के भविष्य की नींव भी डगमगाती दिखती है। अधिकांश शासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है। कई विद्यालयों में केवल एक शिक्षक है जो सभी कक्षाओं को संभालने की कोशिश करता है। कई बार स्कूल महीनों तक बंद रहते हैं। विद्यालय भवनों की हालत जर्जर है, शौचालय नहीं हैं, और न ही खेल-कूद या पुस्तकालय जैसी सुविधाएं।

बच्चों की पढ़ाई रुक-रुक कर होती है, और धीरे-धीरे शिक्षा से उनका मोहभंग हो जाता है। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है, जो आर्थिक रूप से सभी के लिए संभव नहीं।

जनप्रतिनिधियों सरकारी उदासीनता और जनआंदोलन की आवश्कता

वही जानकारों की माने तो मवई जैसे क्षेत्र दशकों से उपेक्षित हैं। योजनाएं आती हैं, घोषणाएं होती हैं, लेकिन ज़मीनी काम नगण्य होता है। यहां के लोग लगातार छत्तीसगढ़-डिंडोरी-अमरकंटक मार्ग के निर्माण की मांग कर रहे हैं। लेकिन अभी तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।

सरकार यदि ईमानदारी से चाह ले, तो इस क्षेत्र को आदर्श विकासखंड बनाया जा सकता है। यहां पर्यटन, जैविक खेती, वनोपज उद्योग और हरित रोजगार के अनेक अवसर हैं। लेकिन इसके लिए प्राथमिक ज़रूरत है – सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी ढांचे का निर्माण।

जनप्रतिनिधियों से अब भी उम्मीद हैं बाकी

वही जानकारी के अनुसार मवई एक सुंदर वनांचल क्षेत्र है, जहाँ पर बड़े बड़े सरई के पेड़ और मिट्टी में खुशबू है, जंगलों में जीवन है, और लोगों में संघर्ष की ताकत है। लेकिन यह इलाका तभी आगे बढ़ पाएगा जब सरकार और स्थानीय विधायक इस और गंभीर होकर विकास की योजनाएं यहां उतारे, और उन्हें सच्चाई से लागू करे।

मवई में जब तक एक अच्छी सोच के साथ लोगो के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंचेंगी, तब तक मवई जैसे इलाके पिछड़े रहेंगे। हमें ज़रूरत है स्थानीय लोगों की आवाज़ को ऊपर तक पहुंचाने की, ताकि यह वनांचल फिर से “विकास का द्वार” बन सके। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का शिकार हो रही है वनांचल के ग्रामीण जहाँ आज भी दुरस्थ स्थानो में लोग मुलभूत सुविधाएं से वंचित नजर आ रहे है जहाँ न विधायक और न ही सांसद ग्रामीणों की समस्याओं की ओर ध्यान से रहें जिस कारण से स्थानीय लोगों में जिला प्रशासन सहित जनप्रतिनिधियों के प्रति आक्रोश पनप रहा हैं।

Share This Article
Translate »