ऑनलाइन सिस्टम, फिर भी शिक्षक गायब; आखिर शिक्षा विभाग डेटा देखता है या सिर्फ फाइलें?

Revanchal
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शहरों में शिक्षकों की भरमार, गांवों में अतिथि शिक्षकों के भरोसे भविष्य गढ़ने की मजबूरी

दैनिक रेवांचल टाइम्स सिवनी– जिले का शिक्षा विभाग पूरी तरह ऑनलाइन व्यवस्था से संचालित होने का दावा करता है। विभाग के पास हर स्कूल की छात्र संख्या, शिक्षकों की पदस्थापना, रिक्त पद और पूरी जानकारी उपलब्ध है। इसके बावजूद ग्रामीण स्कूल आज भी शिक्षकों के लिए तरस रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पूरा डेटा विभाग के पास उपलब्ध है तो आखिर जिम्मेदार अधिकारी किस आधार पर व्यवस्थाएं संचालित कर रहे हैं?

50-50 बच्चों वाले दो स्कूल, लेकिन व्यवस्था शून्य

ग्राम खमरिया का मामला व्यवस्था की हकीकत बयां कर रहा है। प्राथमिक शाला में लगभग 50 विद्यार्थी हैं और माध्यमिक विद्यालय में भी लगभग 50 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

प्राथमिक विद्यालय में दो शिक्षक पदस्थ थे, लेकिन लगभग दो साल पहले माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक नहीं होने के कारण एक शिक्षक को वहां भेज दिया गया। इसके बाद पूरी व्यवस्था अतिथि शिक्षकों के भरोसे चलने लगी।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एक विद्यालय की समस्या का समाधान दूसरे विद्यालय को कमजोर करके किया जा सकता है?

डेटा ऑनलाइन है तो जिम्मेदारी ऑफलाइन क्यों हो गई?

यदि दो वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है तो इसका सीधा अर्थ है कि विभागीय समीक्षा कहीं न कहीं कागजों तक सीमित रह गई है।

अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने लंबे समय तक यह स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे दूर रही?

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