पवई का जीवनदायिनी पुल बना मौत का फंदा, गड्ढों से यात्रियों की जान पर संकट

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Powai's lifeline bridge has become a death trap, with potholes endangering commuters' lives.

पवई।
स्थानीय तहसील मुख्यालय पवई से महज आधे किलोमीटर दूर पतने नदी पर बना पुल अब खतरे की घंटी बजाने लगा है। नेशनल हाईवे पर स्थित यह पुल बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुका है, जिसके चलते यहां से गुजरना वाहन चालकों और यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

यह पुल न केवल पवई नगर और आसपास की सैकड़ों ग्राम पंचायतों को जोड़ता है, बल्कि प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थलों—हनुमान भाटे मां कलेही धाम, बाबा कैलाशी औघड़नाथ, भगवान जगन्नाथ स्वामी मंदिर और बालाजी भूत भावन भोलेनाथ शंकर की टोरिया—का मुख्य मार्ग भी है। नववर्ष के अवसर पर इसी पुल से एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं का आवागमन हुआ था, लेकिन जर्जर पुल ने उनकी यात्रा को जोखिम भरा बना दिया।

लोहे की सरिया बाहर, आरसीसी गायब

पुल की सतह पर आधे फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। आरसीसी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है और लोहे की सरिया खुलेआम बाहर झांक रही हैं। जब भी कोई भारी वाहन इस पुल से गुजरता है, तो पुल हिलने और कंपन करने लगता है। पुल पर चढ़ने वाली सड़क भी जगह-जगह से उखड़कर गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।

पर्यटन और सुरक्षा दोनों पर संकट

प्रदेश के पर्यटन की पहचान बने इन धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का यही मुख्य मार्ग है। जर्जर पुल की यह हालत प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए नवरात्रि से पहले पुल की मरम्मत होना बेहद जरूरी है, वरना कभी भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है।

Powai's lifeline bridge has become a death trap, with potholes endangering commuters' lives.
Powai’s lifeline bridge has become a death trap, with potholes endangering commuters’ lives.

कछुआ चाल से चल रहा नया पुल निर्माण

पतने नदी पर नया पुल निर्माण कार्य शुरू तो हुआ है, लेकिन कछुआ चाल की रफ्तार से। ऐसे में यात्रियों को फिलहाल पुराने और जीर्ण-शीर्ण पुल से ही गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि बार-बार आवाज़ उठा चुके हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।

जनता की मांग है कि प्रशासन तत्काल प्रभाव से पुराने पुल की मरम्मत कराए और नए पुल के निर्माण कार्य में तेजी लाए, ताकि आने वाले पर्व-त्योहारों और पर्यटक सीजन में श्रद्धालु सुरक्षित यात्रा कर सकें।

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