88 की उम्र में हर सुबह सड़क साफ कर देश सेवा करने वाले रिटायर्ड आईपीएस इंदरजीत सिंह सिद्धू को हुआ पद्म श्री से सम्‍मान

Revanchal
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88-year-old former IPS officer sets out with a broom in his hand Who is Padma  Shri awardee Inderjit Sidhu हाथ में झाड़ू लेकर निकल पड़ते हैं 88 साल के  पूर्व IPS, कौन

इंदरजीत सिंह सिद्धू की यात्रा सिखाती है कि देश सेवा सिर्फ़ सरकारी पद पर रहते हुए ही नहीं, बल्कि हर दिन छोटे-छोटे कर्मों से भी की जा सकती है, भले ही व्यक्ति उम्रदराज़ हो।

नई दिल्ली/चंडीगढ़ – 88 साल की उम्र में भी हर सुबह चंडीगढ़ की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई स्वयं करने वाले रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू को इस वर्ष पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। यह घोषणा गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर केंद्र सरकार द्वारा की गई, जिसमें उन्हें ‘अनसुंग हीरो’ श्रेणी में यह प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान मिला है।

सेना की सेवा के बाद समाज सेवा का अनूठा मार्ग
सिद्धू ने पंजाब पुलिस में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) के रूप में सेवा की थी और 1996 में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने सेवा की भावना नहीं छोड़ी और अपने पड़ोस – चंडीगढ़ के सेक्टर-49 में हर दिन सवेरे घर से निकलकर सड़कों, पार्कों और खुले इलाकों की सफाई करना शुरू कर दिया। उनकी दिनचर्या सुबह 7 बजे से कई घंटे तक चलती है, जिसमें वे अकेले कूड़ा उठाते, झाड़ू लगाते और उसे संभालते हैं।

सफाई को बनाया व्यक्तिगत मिशन
सिद्धू ने यह कदम उठाया क्योंकि उन्होंने देखा कि उनके इलाके में कूड़ा बिखरा रहता है और बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसलिए उन्होंने कठिन निर्णय लिया कि शिकायत करने के बजाय स्वयं कार्य करेंगे। परिणामस्वरूप उनकी यह मुहिम सोशल मीडिया पर वायरल हुई और उन्होंने लोगों का ध्यान स्वच्छता की ओर आकर्षित किया।

सम्मान और सराहना
पद्म श्री मिलने के बावजूद सिद्धू का दिनचर्या नहीं बदला है। उन्हें सुबह 8:11 बजे गृह मंत्रालय से पद्म श्री की सूचना मिली, लेकिन उन्होंने सहजता से यह खबर सबको बताए बिना अपनी रोज की सफाई जारी रखी। उनका यह समर्पण “सेवा करने की भावना उम्र से बंधी नहीं होती” का ज्वलंत उदाहरण है।

लोगों की प्रतिक्रिया
सिद्धू की प्रतिबद्धता ने नागरिकों के बीच भी प्रेरणा जगाई है। लोग उन्हें समाज का “हीरो” और दुनिया को स्वच्छ बनाने के लिए एक जीवंत उदाहरण के रूप में देखते हैं। कई ने कहा है कि उनकी कहानी से प्रेरणा लेकर युवा भी स्वच्छता और समाज सेवा में योगदान दे सकते हैं।

सरकारी और सामाजिक पहल
चंडीगढ़ के प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी इस समर्पित सेवा को सराहा है और कहा है कि यह सम्मान उन लोगों के लिए संदेश है जो नियमित जीवन में भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। पद्म श्री से सम्मानित होने पर प्रशासन का कहना है कि यह नागरिकों के बीच सफाई और जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत करेगा।

रिटायर्ड आईपीएस इंदरजीत सिंह सिद्धू ने साबित किया है कि सेवा की कोई उम्र नहीं होती और समाज के प्रति जिम्मेदारी हमेशा जीवित रह सकती है।

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