रेवांचल टाइम्स मंडला धनगर समाज में उत्साह न्याय, सुशासन और जनकल्याण की प्रतीक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा का अनावरण रविवार को मंडला जिले के महाराजपुर में आयोजित भव्य समारोह में किया जाएगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन की कैबिनेट मंत्री संपतिया उईके मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहकर प्रतिमा का अनावरण करेंगी। कार्यक्रम को लेकर धनगर समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
धनगर समाज लंबे समय से मंडला जिले में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित किए जाने की मांग कर रहा था। समाज का मानना है कि अहिल्याबाई होलकर केवल एक महान शासक ही नहीं, बल्कि न्याय, धर्म, सेवा और लोककल्याण की जीवंत मिसाल थीं। समाज की इस लंबे समय से चली आ रही मांग के पूर्ण होने पर लोगों में खुशी का माहौल है और बड़ी संख्या में समाजजन समारोह में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के खोड़ी ग्राम में हुआ था। उनका विवाह मराठा साम्राज्य के प्रसिद्ध होलकर राजवंश के संस्थापक मल्हारराव होलकर के पुत्र खंडेराव होलकर के साथ हुआ था। साधारण परिवार में जन्मी अहिल्याबाई ने अपने असाधारण व्यक्तित्व, दूरदर्शिता और प्रशासनिक क्षमता के बल पर भारतीय इतिहास में एक विशिष्ट स्थान प्राप्त किया।
सन् 1754 में कुम्हेर के युद्ध के दौरान उनके पति खंडेराव होलकर का निधन हो गया था। इस कठिन परिस्थिति में भी उन्होंने धैर्य और साहस का परिचय दिया। अपने ससुर मल्हारराव होलकर के मार्गदर्शन में उन्होंने शासन-प्रशासन की बारीकियां सीखीं। बाद में सन् 1767 में पेशवा की अनुमति प्राप्त होने के बाद उन्होंने मालवा राज्य की पूर्ण बागडोर संभाली और एक आदर्श शासक के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।
अहिल्याबाई होलकर को सनातन संस्कृति और धर्म की महान संरक्षक माना जाता है। उनके शासनकाल में देश के अनेक महत्वपूर्ण मंदिरों और धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार कराया गया। उन्होंने अपने राजकोष से धन व्यय कर उन मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया, जिन्हें आक्रमणकारियों द्वारा क्षति पहुंचाई गई थी। उनके द्वारा कराए गए प्रमुख कार्यों में काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर तथा महाकालेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार विशेष रूप से उल्लेखनीय है। धार्मिक स्थलों के संरक्षण और पुनर्निर्माण के कारण उन्हें सनातन धर्म की महान संरक्षक के रूप में सम्मान प्राप्त हुआ।
प्रशासनिक दृष्टि से भी उनका शासनकाल अत्यंत सफल माना जाता है। उन्होंने व्यापार और कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं लागू कीं। राज्य में सड़कों का निर्माण कराया गया तथा यात्रियों की सुविधा के लिए धर्मशालाएं और विश्राम गृह बनवाए गए। उनकी नीतियां प्रजा के कल्याण पर केंद्रित थीं, जिसके कारण उनका शासन न्याय और सुशासन का आदर्श उदाहरण बन गया।
लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की सबसे बड़ी विशेषता उनकी निष्पक्ष न्याय व्यवस्था थी। कहा जाता है कि वे न्याय के मामलों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करती थीं। उनके न्यायप्रिय स्वभाव का सबसे चर्चित उदाहरण तब सामने आया, जब उनके पुत्र मालेराव के रथ के नीचे आकर एक गाय का बछड़ा कुचल गया। प्रचलित कथाओं के अनुसार, उन्होंने निष्पक्ष शासक होने के नाते अपने पुत्र को भी दंडित करने का निर्णय लिया। इसी प्रकार के अनेक उदाहरणों के कारण जनता उन्हें न्याय की देवी के रूप में पूजती है।
अहिल्याबाई होलकर भगवान शिव की अनन्य भक्त थीं। वे स्वयं को ईश्वर का सेवक मानती थीं और उनका विश्वास था कि न्याय ही ईश्वर का सच्चा स्वरूप है। उन्होंने अपने जीवन और शासन को धर्म, सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया था। यही कारण है कि आज भी उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है।
उनकी महान सेवाओं और योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1996 में उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया था। वहीं इंदौर स्थित देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तथा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का नाम भी उनके सम्मान में रखा गया है।
महाराजपुर में उनकी प्रतिमा स्थापना को धनगर समाज अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहा है। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के आदर्श आज भी समाज को न्याय, सेवा, सुशासन और जनकल्याण का संदेश देते हैं। प्रतिमा स्थापना से नई पीढ़ी को उनके जीवन और कार्यों से प्रेरणा मिलेगी तथा समाज में उनके विचारों का व्यापक प्रसार होगा। रविवार को होने वाले अनावरण समारोह को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
