जबलपुर। सवाल सिर्फ 6,600 नशीले इंजेक्शनों का नहीं है। सवाल यह है कि आखिर किस तरह शहर की गलियों में जहर पहुंचाने का एक पूरा नेटवर्क तैयार हो चुका था। यह वह जहर था, जो सीधे-सीधे जबलपुर के युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने की तैयारी कर रहा था। लेकिन इससे पहले कि यह खेप शहर की नसों तक पहुंचती, जबलपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए इस पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ दी।
पुलिस ने बेलबाग और अधारताल थाना क्षेत्रों में की गई दो अलग-अलग कार्रवाइयों में कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से लगभग 15 लाख रुपये मूल्य के 6,600 अवैध नशीले इंजेक्शन… एविल और टॉल्जेसिक…बरामद किए गए हैं। साथ ही तस्करी में इस्तेमाल किया जा रहा ई-रिक्शा और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध जितेन्द्र सिंह, सीएसपी अधारताल राजेश्वरी कौरव और डीएसपी अपराध उदयभान बागरी के मार्गदर्शन में की गई। जिस तरह से पुलिस ने मुखबिर की सूचना को तकनीकी और जमीनी स्तर पर विकसित कर पूरे नेटवर्क की परतें खोलीं, वह निश्चित रूप से सराहनीय है।
ई-रिक्शा में भरकर पहुंचाया जा रहा था नशे का जाल
बेलबाग पुलिस ने रामलीला मैदान के पास घेराबंदी कर समता कॉलोनी निवासी ई-रिक्शा चालक दुर्गा पटेल को पकड़ा। उसके ई-रिक्शा से 3,200 नशीले इंजेक्शन बरामद हुए। पूछताछ शुरू हुई तो एक-एक कर कई नाम सामने आने लगे।
जांच में पता चला कि यह खेप गाजी नगर निवासी अमजद खान के कहने पर हनुमानताल निवासी मोहम्मद आरिफ के घर से उठाई गई थी और इसे मदनमहल क्षेत्र में पहुंचाया जाना था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरिफ और अमजद खान को हिरासत में लिया।
पूछताछ आगे बढ़ी तो ओमती निवासी सैय्यद असरफ अली उर्फ जीजा का नाम सामने आया। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी सामने आया कि मदनमहल निवासी सौरभ नामदेव के साथ मिलकर इस पूरे अवैध कारोबार को संचालित किया जा रहा था। हालांकि मुख्य सरगना सौरभ सोनकर और इंजेक्शनों का सप्लायर अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
अधारताल में भी पकड़ी गई बड़ी खेप
उधर अधारताल थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार के नेतृत्व में पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने मिल्क स्कीम मैदान के पीछे दबिश देकर गीतांशु साहू को गिरफ्तार किया। उसके पास से 3,400 नशीले इंजेक्शन बरामद हुए।
पूछताछ में गीतांशु ने खुलासा किया कि ये इंजेक्शन भानतलैया निवासी कल्लू दद्दा ने बिक्री के लिए रखवाए थे। इस खुलासे के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।
बड़ा सवाल: आखिर कहां से आ रहा है यह जहर?
यह कार्रवाई सिर्फ गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि यह उस खतरनाक सच्चाई को भी सामने लाती है कि नशीले इंजेक्शनों का कारोबार अब संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है। यदि यह खेप बाजार तक पहुंच जाती तो हजारों युवाओं की जिंदगी बर्बादी के रास्ते पर धकेली जा सकती थी।
ऐसे समय में जब नशा समाज के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है, तब जबलपुर पुलिस की यह कार्रवाई न केवल एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह संदेश भी है कि कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं होगा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश ड्रग्स कंट्रोल एक्ट तथा एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है, जबकि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
नशे के खिलाफ यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन इतना तय है कि जबलपुर पुलिस ने शहर के युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने की एक बड़ी साजिश को समय रहते विफल कर दिया है।
मुहम्मद अनवार बाबू
