सेवा और भक्ति का संगम 90 हजार से अधिक लोग हुए लाभान्वित, विशाल संकीर्तन यात्रा
रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
जितेन्द्र अलबेला
स्थानीय खजरी स्थित आशाराम आश्रम में परम पूज्य संत आशाराम बापू का 90वाँ अवतरण दिवस प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी श्रद्धा और सेवा के अनूठे संगम के साथ मनाया गया।
श्री शक्ति ट्रस्ट, संस्कृत पुस्तकोंन्नति सभा और योग वेदांत सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस ‘विश्व सेवा सत्संग सप्ताह’ के दौरान समूचा जिला भक्तिमय नजर आया।

नर सेवा ही नारायण सेवा विविध सेवा कार्य
समिति द्वारा सप्ताह भर चले आयोजनों में केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार की झलक भी देखने को मिली। भीषण गर्मी को देखते हुए हजारों राहगीरों को ठंडी छाछ पिलाई गई। इसके साथ ही जिला चिकित्सालय और वृद्धाश्रम में फल वितरण कर मरीजों और बुजुर्गों का हाल जाना गया। आश्रम आए हजारों साधकों के लिए विशाल भंडारे और भोजन प्रसाद की व्यवस्था भी की गई।

धार्मिक अनुष्ठानों से महका आश्रम
अवतरण दिवस के मुख्य दिन सुबह से ही साधकों का तांता लगा रहा। कार्यक्रम की शुरुआत चरण पादुका पूजन से हुई, जिसके पश्चात आशारामायण पाठ, गुरुगीता पाठ एवं भव्य हवन-पूजन संपन्न हुआ। दिव्य मंत्रोच्चार से आश्रम का वातावरण अत्यंत पवित्र और ऊर्जामय हो गया।
नगर में निकली भव्य संकीर्तन यात्रा
शाम 6 बजे गुरुकुल परिसर से विशाल संकीर्तन यात्रा का शुभारंभ हुआ। यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों श्री षष्टि माता मंदिर, मोहन नगर, मानसरोवर कॉम्प्लेक्स, जेल तिराहा, फव्वारा चौक, बुधवारी बाजार और छोटी बाजार से होते हुए गुजरी।
भव्य स्वागत नगर वासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा और आरती के साथ यात्रा का स्वागत किया। संकीर्तन की धुन पर नाचते-झूमते भक्तों ने पूरे शहर को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।
देशभर में सेवा का कीर्तिमान
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पूज्य बापू का जन्मोत्सव देशभर के 550 आश्रमों और 2500 समितियों के माध्यम से गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा कर मनाया जाता है। देशभर में जहाँ करोड़ों लोग लाभान्वित हुए, वहीं अकेले छिंदवाड़ा जिले में यह आंकड़ा 90 हजार के पार रहा।
इनकी रही मुख्य भूमिका
इस दिव्य आयोजन को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष मदन मोहन परसाई, जयराम भाई संचालक खजरी आश्रम, दर्शना खट्टर गुरुकुल संचालिका, साध्वी नीलू बहन, सोमनाथ पवार, साध्वी प्रतिमा बहन, साध्वी रेखा बहन सहित सुभाष इंगले, गेंदराव कराड़े, धनाराम सनोडिया, पी. आर. शेरके, एम. आर. पराड़कर और महिला समिति की सक्रिय सदस्यों ने अपनी समर्पित सेवाएँ दीं।
