जबलपुर में बेखौफ बदमाशों का आतंक: कहीं चाकू की नोक पर लूट, तो कहीं आधी रात वाहनों को आग के हवाले

Revanchal
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जबलपुर में अपराध का नया भूगोल: एक तरफ चाकू की नोक पर लूट, दूसरी तरफ रात के अंधेरे में आग
जबलपुर। शहर बदल रहा है। सड़कें वही हैं, मोहल्ले वही हैं, पुलिस थाने भी वहीं हैं। लेकिन अपराध का तरीका बदल रहा है और शायद उसका आत्मविश्वास भी।
जबलपुर के दो अलग-अलग इलाकों से आई दो घटनाएं सिर्फ एफआईआर की खबरें नहीं हैं। ये उस बेचैनी की कहानी हैं, जो शहर के आम लोगों के भीतर धीरे-धीरे घर कर रही है।


पहली घटना गोरखपुर थाना क्षेत्र के नयागांव रामपुर स्थित साई नगर व्ह्यू पॉइंट की है। एक 19 वर्षीय छात्र अपने दोस्तों के साथ घूमने गया था। पढ़ाई करने वाला लड़का, दोस्तों के साथ कुछ समय बिताने निकला था। लेकिन उसके सामने चार युवक आ खड़े हुए। एक ने गर्दन पर चाकू रख दिया। दूसरे ने मोबाइल और गले की चांदी की चेन छीन ली। बाकी दो उसके दोस्तों को पकड़ने की कोशिश करते रहे। कुछ मिनटों की यह घटना शायद उस छात्र के मन में लंबे समय तक दर्ज रहेगी।


सवाल सिर्फ मोबाइल और चेन का नहीं है। सवाल यह है कि क्या शहर के सार्वजनिक स्थान अब युवाओं के लिए भी सुरक्षित नहीं बचे हैं?
दूसरी घटना माढ़ोताल थाना क्षेत्र के रैगवां गांव की है। आधी रात का समय। लोग अपने घरों में सो रहे थे। तभी आग की लपटें उठीं। बाहर खड़ी तीन दोपहिया गाड़ियां जल रही थीं। पल्सर, सीटी-100 और एक्टिवा। आग इतनी तेज थी कि पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया। लोग घरों से बाहर निकल आए। किसी तरह आग बुझाई गई, लेकिन तब तक वाहन राख में बदल चुके थे।
यह आग सिर्फ तीन गाड़ियों को नहीं जला रही थी। यह लोगों के मन में सुरक्षा की भावना को भी झुलसा रही थी।
दो घटनाएं। दो इलाके। दो अलग तरीके। लेकिन एक ही सवाल।
क्या अपराधियों को अब पकड़े जाने का डर नहीं रह गया है?
पुलिस दोनों मामलों में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। जांच चल रही है। आरोपी तलाशे जा रहे हैं। यह पुलिस का अपना काम है और उसे करना भी चाहिए। लेकिन समाज का सवाल इससे बड़ा है।


जब कोई छात्र घूमने जाए और लूट लिया जाए, जब कोई परिवार रात में सो रहा हो और बाहर खड़ी गाड़ियां आग के हवाले कर दी जाएं, तब यह केवल अपराध की घटना नहीं रह जाती। यह शहर के नागरिकों के भरोसे पर हमला बन जाती है।
जबलपुर के लोग यह जानना चाहते हैं कि उनके शहर में आखिर हो क्या रहा है? और उससे भी बड़ा सवाल यह कि जो अपराधी आज चाकू दिखाकर लूट रहे हैं और रात में आग लगा रहे हैं, उन्हें रोकने के लिए व्यवस्था कितनी तैयार है?


खबरें अक्सर घटना बताकर खत्म हो जाती हैं। लेकिन असली खबर घटना के बाद शुरू होती है। क्योंकि हर ऐसी वारदात के बाद शहर का एक हिस्सा थोड़ा और असुरक्षित महसूस करने लगता है।

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