स्कूल खुलने से पहले बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने 5 जून को सौंपा गया था पत्र, धरातल पर कार्रवाई अब तक नहीं

Revanchal
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बेहतर शिक्षा पर सत्र की शुरुआत से ही सवाल, बच्चों के भविष्य पर संकट

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मण्डला। नवीन शिक्षा सत्र 8 जून से प्रारंभ होने से पूर्व जिले के सभी शासकीय-अशासकीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर पालक महासंघ के पदाधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता पी.डी. खैरवार व चंद्रगुप्त नामदेव ने 5 जून को जिला स्रोत समन्वयक, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास तथा सहायक संचालक शिक्षा को पत्र सौंपकर चर्चा की थी पर दस दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं। जिससे इस शिक्षा सत्र में भी भी बच्चों की अच्छी शिक्षा पर सवाल ही सवाल खड़े हो रहे हैं।

पत्र में बताया गया था,कि स्कूलों में अति आवश्यक सुविधाओं के अभाव में बच्चों का पढ़ाई से मोहभंग होता सा जा रहा है। जिससे बच्चे असामाजिक गतिविधियों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे सशक्त समाज और समृद्ध भारत की परिकल्पना बाधित हो रही है। स्कूलों के खोले जाने से पहले अति आवश्यक सुविधाओं को दुरुस्त कर लिए जाने की सख्त जरूरत पत्र में बताई गई थी। जिसके लिए प्रशासन भी लगातार लगा ही रहता है पर नतीजा सिफर।

पत्र में उठाए गए प्रमुख मुद्दे:

  1. शिक्षक संकट: दूरस्थ क्षेत्रों में अतिथि शिक्षक भर्ती, शिक्षकों की संख्या संतुलित करना, खेल, संगीत, योग शिक्षकों की नियुक्ति। नशे के आदी व लापरवाह शिक्षकों को हटाना तथा गैर-शैक्षणिक कार्य बंद कराना।
  2. पर्याप्त स्टाफ: प्रत्येक स्कूल में सफाईकर्मी, भृत्य, चौकीदार, क्लर्क व कम्प्यूटर ऑपरेटर की भर्ती ताकि शिक्षक सिर्फ अध्यापन कार्य करें।
  3. जर्जर भवन: कक्षों की कमी व जर्जर भवनों की मरम्मत या पुनर्निर्माण।
  4. शुद्ध पेयजल: नल-जल कनेक्शन व हैंडवाश यूनिट सुधार। मण्डला के बुजबुजिया घोड़ाडीह प्रा. शाला में दूषित पानी से बच्चों के दांत खराब हो रहे हैं।
  5. अन्य सुविधाएं: समय पर सबको पाठ्य-पुस्तकों का वितरण,ड्रेस वितरण, साइकिल वितरण, स्कूलों को राशि , समतल खेल मैदान, खेल सामग्री, बिजली, पंखे-कूलर, शौचालय, व्यवस्थित रसोईघर, बाउंड्री वॉल, सुगम पहुंच मार्ग व अधूरे निर्माण पूर्ण कराना।

स्कूलों/छात्रावासों में गैस सिलेंडर संकट
रसोई गैस सिलेंडर की रिफिलिंग में भारी समस्या चल रही है। बिना गैस के हजारों बच्चों का मध्यान्ह भोजन और छात्रावास का खाना कैसे बनेगा? इसका सीधा असर गरीब-आदिवासी बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। तत्काल गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

चेतावनी: पत्र में कहा गया कि स्कूलों में आवश्यक सुविधाओं के अभाव में घर जैसा माहौल न मिलने से विद्यार्थियों का पढ़ाई और स्कूल के रति मोह भंग हो जाता है। स्कूलों से वे मन से नहीं जुड़ पाते हैं। पलायन, नशे, अंधविश्वास व भिक्षावृत्ति की ओर मुड़ते जा रहे हैं। इसका दुष्प्रभाव परीक्षा परिणाम व मानसिक-बौद्धिक स्तर पर पड़ रहा है।

सभी विद्यालयों में सुविधाओं की बारीकी से जांच कराकर बिंदुवार शीघ्र कार्रवाई करने तथा की गई कार्यवाही से अवगत कराने का आग्रह किया गया है।

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