स्थानांतरित सचिव की तानाशाही से ठप पड़ी पंचायत व्यवस्था

Revanchal
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कार्यभार नहीं सौंप रहे सचिव

उच्चाधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल; जनपद अध्यक्ष ने कलेक्टर से की सख्त कार्रवाई की मांग

दैनिक रेवांचल टाइम्स, घुघरी (मंडला)।

मंडला जिले की जनपद पंचायत घुघरी अंतर्गत ग्राम पंचायत लाटो में स्थानांतरित सचिव की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण पंचायत का कामकाज प्रभावित होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के डेढ़ माह बाद भी सचिव मिटठन लाल विश्वकर्मा न तो नई पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर रहे हैं और न ही ग्राम पंचायत लाटो का चार्ज नवपदस्थ सचिव रूक्मणी उईके को सौंप रहे हैं। इससे ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो रही है और पंचायत का नियमित संचालन बाधित है।


जनपद पंचायत घुघरी की अध्यक्ष जनिया बाई मरावी ने इस संबंध में कलेक्टर मंडला को लिखित शिकायत सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि जिला पंचायत मंडला द्वारा 15 जून 2026 को जारी आदेश के अनुसार सचिव मिटठन लाल विश्वकर्मा का स्थानांतरण ग्राम पंचायत किसली तथा रूक्मणी उईके की पदस्थापना ग्राम पंचायत लाटो में की गई थी। इसके बावजूद आज तक आदेश का पालन नहीं किया गया।

भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच कार्यभार रोकने की कोशिश

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि सचिव मित्ठन लाल विश्वकर्मा के कार्यकाल में ग्राम पंचायत भवन निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों में लाखों रुपये की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इन शिकायतों की जांच की मांग पहले भी की जा चुकी है। आरोप है कि इन्हीं मामलों से बचने के लिए सचिव जानबूझकर कार्यभार सौंपने में टालमटोल कर रहे हैं और अपने स्थानांतरण को रुकवाने के प्रयास में लगे हुए हैं।

प्रधानमंत्री आवास सहित कई योजनाएं प्रभावित

कार्यभार नहीं सौंपे जाने के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना, विकास कार्यों के भुगतान, पंचायत के प्रशासनिक कार्य, प्रमाण-पत्रों की प्रक्रिया तथा अन्य शासकीय योजनाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है। सबसे अधिक परेशानी ग्रामीणों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी पंचायत के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

ग्राम पंचायत ने भी लगाया आरोप

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्राम पंचायत लाटो की ओर से भी जनपद पंचायत अध्यक्ष को अलग आवेदन देकर बताया गया है कि पूर्व सचिव द्वारा चार्ज नहीं दिए जाने से पंचायत का नियमित कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान कराने की मांग की है।

बड़ा सवाल – आदेश का पालन कौन कराएगा?

यह मामला केवल एक सचिव की मनमानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। यदि स्थानांतरण के स्पष्ट आदेश के बाद भी कोई कर्मचारी महीनों तक कार्यभार नहीं सौंपता और उसके विरुद्ध कार्रवाई नहीं होती, तो शासन के आदेशों की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। आखिर ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी किसकी है? यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इसका सीधा खामियाजा ग्रामीणों और पंचायत व्यवस्था को ही भुगतना पड़ेगा।
अब देखना यह होगा कि कलेक्टर मंडला इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और शासन के आदेशों की अवहेलना करने वाले सचिव के विरुद्ध कब तक प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित होती है।

आपके द्वारा मुझे जानकारी मिली है कि सचिव के द्वारा प्रभार नहीं दिया गया है ऐसा है तो मैं दिखवा लेता हूं और कल ही कार्रवाई करवाता हूं


शाश्वत सिंह मीणा
मुख्य कार्यपालन अधिकारी
जिला पंचायत मंडला

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